
जयपुर। पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के बीच राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है। तीन वर्षों से चुनाव न होने से छात्रों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। राजस्थान विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों में धरना, प्रदर्शन और अनशन जारी हैं। सितंबर में प्रस्तावित निकाय चुनाव से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार छात्रसंघ चुनाव कराएगी या एक बार फिर टाल देगी।
बता दें कि सितंबर में निकाय चुनाव प्रस्तावित है। यदि उससे पहले छात्रसंघ चुनाव कराए जाते हैं तो विश्वविद्यालय परिसर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन सकते हैं, जिसका असर निकाय चुनाव पर पड़ सकता है। वहीं चुनाव न होने पर युवाओं का असंतोष और बढ़ेगा। राजस्थान विश्वविद्यालय में आंदोलन लगातार तेज हैं। परिसर में 16 दिनों से छात्र धरने पर बैठे हैं, जबकि छात्रनेता शुभम रेवाड़ 8 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। अन्य विश्वविद्यालयों और सरकारी महाविद्यालयों में भी प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं।
छात्रों का कहना है कि यदि स्थानीय निकाय चुनाव समय पर हो सकते हैं तो छात्रसंघ चुनाव टालने का कोई औचित्य नहीं है। इधर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में गुरुवार को जयपुर में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआइ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शन के दौरान राजस्थान विश्वविद्यालय से जुड़े एनएसयूआई के तीन छात्र नेता टोंक फाटक के पास स्थित एक पानी की टंकी पर चढ़ गए। उन्होंने हाथों में पोस्टर लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस्तीफे और छात्रों से माफी मांगने की मांग उठाई। टंकी पर चढ़े छात्रों में राजस्थान विश्वविद्यालय के एनएसयूआई प्रभारी विजयपाल कुड़ी, छात्र नेत्री वियोना जाट और छात्र नेता कोशेन खान शामिल हैं।
छात्र संगठनों का आरोप है कि चुनाव न होने के बावजूद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश के दौरान विद्यार्थियों से 50 से 100 रुपए तक छात्रसंघ मद में शुल्क लिया जा रहा है। उनका दावा है कि हर साल करोड़ों रुपए की वसूली होती है, जबकि चुनाव आयोजित नहीं किए जाते।
एनएसयूआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है। सरकार क्यों डर रही है, समझ नहीं आता। यदि जल्द घोषणा नहीं हुई तो एनएसयूआई प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन करेगी।
हम लगातार चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव कराए जाने चाहिए। यदि सरकार कार्यक्रम घोषित नहीं करती तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
-भारत भूषण, राष्ट्रीय संयोजक, एबीवीपी (राजकीय महाविद्यालय)