
Rajasthan High Court : जयपुर। सूफा (एसयूएफए) आतंकी मॉड्यूल मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपियों को झटका देते हुए आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने आरोपियों की अपीलें खारिज कर दीं। हाईकोर्ट ने कहा कि विस्फोटक सामग्री की खरीद-फरोख्त और आतंकी साजिश जैसे गंभीर मामलों में प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री होने पर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाना न्यायसंगत है। कार से मिला था विस्फोटक मामला 30 मार्च 2022 का है। चित्तौड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा सदर थाना पुलिस ने वांडर चौराहे पर नाकाबंदी के दौरान एक कार से करीब तीन किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। कार से घड़ियां, बैटरियां, तार और बल्ब सहित अन्य सामान भी मिला था। बाद में एनआइए ने जांच कर 11 आरोपियों को नामजद किया। इनमें आठ गिरफ्तार हुए, जबकि तीन फरार बताए गए।
आरोपियों के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि कई आरोपी घटना के समय वाहन में मौजूद नहीं थे और उनके पास से कोई अवैध सामग्री भी बरामद नहीं हुई। बचाव पक्ष के अनुसार, कॉल डिटेल, लोकेशन, कथित यात्रा टिकटों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से आरोपियों का अपराध से कोई सीधा या ठोस कानूनी संबंध स्थापित नहीं होता। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त सामग्री के बिना आरोप तय किए हैं। इसलिए आरोपियों को आरोपमुक्त किया जाना चाहिए।
एनआईए ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि रतलाम में करीब 70 युवाओं ने 'सुफा' नामक संगठन बनाया था। एजेंसी के अनुसार, संगठन का उद्देश्य युवाओं को आईएसआईएस से जुड़े वीडियो दिखाकर प्रभावित करना और कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना था। एनआईए ने आरोप लगाया कि 25 मार्च 2022 को हुई एक गुप्त बैठक में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) एकत्र करने, उन्हें जयपुर ले जाने और वहां आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रची गई थी। एजेंसी के अनुसार, इस पूरी गतिविधि के वीडियो भी रिकॉर्ड किए जाने थे, जो बाद में बरामद हुए।
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में प्रथम दृष्टया सामग्री और गंभीर संदेह को देखा जाता है। साक्ष्यों की सत्यता और विश्वसनीयता का विस्तृत परीक्षण मुकदमे की सुनवाई के दौरान होगा। विस्फोटक उपकरणों को बड़े शहर तक ले जाने की कथित साजिश के संभावित परिणामों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।