Jaipur Demolition Case: सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर के बी टू बाइपास के 42 बीघा 10 बिस्वा जमीन पर शेष रहे मकान में तोड़फोड़ या अन्य किसी तरह के एक्शन पर रोक लगा दी। यह रोक हाईकोर्ट में लंबित अपील के निपटारे तक रहेगी।
Jaipur Demolition Case: सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर के बी टू बाइपास के 42 बीघा 10 बिस्वा जमीन पर शेष रहे मकान में तोड़फोड़ या अन्य किसी तरह के एक्शन पर रोक लगा दी। यह रोक हाईकोर्ट में लंबित अपील के निपटारे तक रहेगी। न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश श्रीराम कॉलोनी विकास समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
विकास समिति ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाईकोर्ट की डिविजन बैंच ने 21 अप्रेल को सिंगल बैंच के 9 अप्रेल के आदेश पर रोक लगा दी थी, लेकिन 18 मई को डिविजन बेंच बिना किसी कारण के अचानक रोक को हटा दिया जबकि मूल अपील अभी तक लंबित है। इसलिए 18 मई के आदेश पर रद्द करते हुए निर्माण तोड़ने पर राेक लगाई जाए।
श्रीराम कॉलोनी विकास समिति-बी के महासचिव डीपी मीणा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। आवासन मंडल ने जल्दबाजी में कई परिवारों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया। जानबूझकर मंडल ने ये कार्रवाई की है। कार्रवाई के दौरान मंडल ने मनमानी की और किसी की भी नहीं सुनी।
जयपुर के बी-2 बाइपास स्थित श्रीराम विहार कॉलोनी में राजस्थान आवासन मंडल ने बीते दो दिन बड़ी कार्रवाई करते हुए 120 से अधिक अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला दिया। करीब 42 बीघा 10 बिस्वा सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए चलाए गए अभियान में होटल, इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम, बार और अन्य व्यावसायिक निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि आठ मकानों को फिलहाल मोहलत दी गई।
आवासन मंडल की टीम ने शनिवार से शुरू हुई कार्रवाई को रविवार को भी जारी रखा। मंडल अधिकारियों के अनुसार श्रीराम विहार कॉलोनी क्षेत्र में लंबे समय से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे किए गए थे। इस जमीन पर कई पक्के मकान, दुकानें, होटल और अन्य व्यावसायिक निर्माण खड़े कर दिए गए थे।
सूर्य नगर तारों की कूट विकास समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि मंडल ने कार्रवाई के दौरान उस सड़क को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे कई कॉलोनियों के सैकड़ों लोगों की आवाजाही होती है। समिति अध्यक्ष छोटे लाल मीणा ने बताया कि जिस सड़क को खोदा गया है, उस पर पिछले 50 वर्ष से आवागमन हो रहा है। समिति ने मंडल से सड़क को दुरुस्त कराने की मांग की है।