राजस्थान के गांवों में चल रहे विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से नरेगा की सामग्री मद में अटकी राशि को लेकर अब समाधान की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं।
जयपुर। राजस्थान के गांवों में चल रहे विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से नरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) की सामग्री मद में अटकी राशि को लेकर अब समाधान की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। सरपंच संघ राजस्थान के प्रतिनिधिमंडल की मांगों के बाद राज्य सरकार ने नरेगा के तहत सामग्री मद में 1200 करोड़ रुपए की राशि जारी करने का फैसला किया है। यह राशि सोमवार से प्रदेश की पंचायत समितियों में भेजी जाएगी, जिससे रुके हुए निर्माण कार्यों को गति मिलेगी और ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
सरपंच संघ राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शासन सचिवालय में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पंचायतीराज व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याओं और लम्बे समय से रुके हुए भुगतानों का मुद्दा उठाया। मुख्य प्रवक्ता रफीक पठान ने जानकारी दी कि नरेगा सामग्री मद में करीब 5000 करोड़ रुपए, राज्य वित्त आयोग के 4500 करोड़ और केंद्रीय वित्त आयोग के तहत चालू वित्त वर्ष के 1500 करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं।
इस पर नरेगा आयुक्त पुष्पा सत्यानी और उपायुक्त जुगल किशोर मीणा ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार से प्राप्त 1200 करोड़ की राशि में से 300 करोड़ मजदूरी और कारीगर भुगतान के लिए पंचायत समितियों में पहले ही भेजी जा चुकी है। शेष 900 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. करौड़ी लाल मीणा से मिल चुकी है और यह राशि सोमवार से पंचायत समितियों में ट्रांसफर की जाएगी। इससे संबंधित भुगतान प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।
पंचायतीराज सचिव जोगाराम और उप शासन सचिव वित्त पवन जेमन ने बताया कि राज्य वित्त आयोग की पहली किस्त के रूप में 500 करोड़ रुपए इसी माह स्थानांतरित कर दिए जाएंगे। साथ ही केंद्र सरकार से अब तक प्राप्त राशि की उपयोगिता रिपोर्ट भेजी जा चुकी है और शेष राशि के लिए केंद्र को पत्र लिखा गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को यह भी अवगत कराया कि वर्तमान में नरेगा योजना में कच्चे और पक्के निर्माण कार्यों को स्वीकृति नहीं दी जा रही है, जिससे स्थायी विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। इसके लिए पुनः स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नेमीचंद मीणा, मुख्य महामंत्री शक्ति सिंह रावत, प्रवक्ता रामप्रसाद चौधरी, संरक्षक भागीरथ यादव, ब्लॉक अध्यक्ष गणेश चौधरी सहित कई सरपंच और पदाधिकारी मौजूद रहे।