नमी और ठंडी हवा की गेहूं और जौ की फसलों को आवश्यकता होती है। ऐसे अगर तीखी धूप रही तो यह फसल जल्द सूखने लग जाएगी। वहीं सिंचाई की कमी से उपज में गिरावट आ सकती है।
राजस्थान में फरवरी महीने में ही दिन का तापमान तेजी से बढ़ने के चलते गर्मी की शुरुआत का अहसास होने लगा है। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। बीते 24 घंटों में राज्य में सर्वाधिक अधिकतम तापमान बाड़मेर में 32 डिग्री रेकॉर्ड किया गया है। मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश भागों में आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है।
किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह से तेज गर्मी पड़ी तो फसलें समय से पहले ही पक जाएंगे। ऐसे में दाने छोटे रह जाएंगे। बता दें कि इस वक्त खेतों में गेहूं, चना, जौ और सरसों की फसल लहरा रही है। मार्च माह में नवीन सीजन की फसलें आना शुरू होंगी। दरअसल सर्दियों का यह मौसम रबी की फसलों के लिए जरूरी होता है। हालांकि ठंड की कमी से फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इस बार फरवरी के महीने में तापमान ज्यादा है।
नमी और ठंडी हवा की गेहूं और जौ की फसलों को आवश्यकता होती है। ऐसे अगर तीखी धूप रही तो यह फसल जल्द सूखने लग जाएगी। वहीं सिंचाई की कमी से उपज में गिरावट आ सकती है। वहीं सरसों की फसल को भी ठंडे मौसम और हल्की ओस की जरूरत होती है।
हालांकि इस फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन तापमान बढ़ने पर फूल झड़ने से उपज कम रह सकती है। चने की फसल भी सर्दी और नमी में ही बेहतर परिणाम देती है। किसानों का मानना है कि इस बार करीब 15 दिन पहले सरसों की फसल काटी जा रही है। क्योंकि अचानक मौसम परिवर्तन के बाद गर्मी बढ़ने लग गई है।
किसानों का कहना है कि फरवरी में दिन का तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जिसका असर गेहूं, चना, जौ और सरसों की फसल पर देखा जा सकता है। हवा के चलने व तापमान में तेजी रहने के कारण फसल में पकाव जल्दी आ जाएगा। इससे दाना कमजोर रहने की आशंका। ऐसे में फसलों में सिंचाई की अधिक जरूरत पड़ेगी।
आपको बता दें कि बीते 24 घंटे में जालोर में अधिकतम तापमान 30.9, डुंगरपुर में 30.8, चित्तौड़गढ़ में 30.3, फलोदी में 30.2, प्रतापगढ़ में 29.9, जोधपुर और कोटा में 29.6 डिग्री रेकॉर्ड किया गया है।