जयपुर

Rto Jaipur: 10,000 VIP नंबरों का फर्जी खेल! परिवहन विभाग में 600 करोड़ का ‘जैकपॉट’ घोटाला, अब ईडी की एंट्री

राजस्थान में 10 हजार वीआईपी नंबरों के हेरफेर की आशंका है। कमेटी ने फर्जीवाड़े में सरकार को 500 से 600 करोड़ रुपए की राजस्व हानि का होना पाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आरटीओ कार्यालयों में वीआईपी नंबरों को नियम विरुद्ध पंजीयन कर बेच दिया गया। इस काम को अंजाम देने के लिए आरसी और आधार सहित अन्य जाली, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।

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Oct 31, 2025
परिवहन विभाग में थ्री डिजिट नंबर स्कैम, पत्रिका फोटो

Rajasthan: जयपुर.आरटीओ कार्यालयों में हुए थ्री डिजिट नंबरों के फर्जीवाड़े के मामले में गठित जांच कमेटी ने राजस्थान में 10 हजार वीआईपी नंबरों के हेरफेर की आशंका जताई है। कमेटी ने फर्जीवाड़े में सरकार को 500 से 600 करोड़ रुपए की राजस्व हानि का होना पाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आरटीओ कार्यालयों में वीआईपी नंबरों को नियम विरुद्ध पंजीयन कर बेच दिया गया। इस काम को अंजाम देने के लिए आरसी और आधार सहित अन्य जाली, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। कमेटी ने स्वीकार किया है कि आरटीओ कार्यालयों में कार्मिकों ने फर्जीवाड़ा कर गंभीर अपराध किया है।

कमेटी ने प्रकरण की जांच अब SOG से कराने की सिफारिश की है। गौरतलब है कि जयपुर आरटीओ कार्यालय प्रथम में आरटीओ राजेन्द्र सिंह शेखावत ने थ्री डिजिट का फर्जीवाड़ा पकड़ा था। कार्यालय के दो कार्मिकों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। परिवहन विभाग में हुए इस फर्जीवाड़े में ईडी की एंट्री भी हो चुकी है। ईडी ने परिवहन विभाग से जांच रिपोर्ट मांगी है।

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ऐसे चला राज्यभर में खेल

इस तरह का फर्जीवाड़ा कोटा, नागौर, जोधपुर, जयपुर, सलूंबर, सवाईमाधोपुर, बूंदी, हनुमानगढ़, उदयपुर और बीकानेर सहित कई जगहों पर हुआ है। 2018 के बाद विभाग ने आदेश जारी किया था कि वाहनों का रजिस्ट्रेशन किसी भी आरटीओ कार्यालय में करवाया जा सकता है। इसी आदेश का फायदा उठाकर अफसर, बाबू और दलालों ने खेल को अंजाम दिया। जिस आरटीओ कार्यालय में नंबर का रिकॉर्ड था, वहां से नंबर को बैकलॉग कराया यानी नंबर को ऑनलाइन चढ़ाया। इसमें फर्जी दस्तावेज भी लगाए। इसके बाद इस नंबर को वाहनों में रजिस्ट्रेशन कराने का काम दूसरे जिलों में किया।

जांच कमेटी की सिफारिशें

आरटीओ कर्यालयों से जिन्होंने अभी तक थ्री डिजिट नंबर लिए हैं, उन सभी की जांच होनी चाहिए।
जिन नंबरों में फर्जीवाड़ा किया है उनका पंजीयन निरस्त किया जाना चाहिए।
ऐसे वीआईपी नंबरों को पोर्टल के माध्यम से खुली नीलामी कर पंजीकरण करवाया जाना चाहिए।
इस काम में लिप्त कार्मिकों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के साथ-साथ कानूनी कार्यवाही भी हो।
जिन आरटीओ अधिकारियों ने अधीनस्थ कार्यालयों में ऐसे आपराधिक गतिविधियों व अनियमितताओं के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की, उन्हें मिलीभगत का दोषी मानते हुए उनके विरूद्ध कार्यवाही की जाए।

दौसा आरटीओ ने नहीं दी रिपोर्ट

कमेटी ने माना है कि जांच को प्रभावित करने के लिए प्रादेशिक व जिला परिवहन कार्यालयों के रजिस्टर आदि के रिकॉर्ड में हेराफेरी, जालसाजी व रिकॉर्ड खुर्द-बुर्द किया गया है। इसके अलावा आरटीओ दौसा ने रिपोर्ट नहीं दी। कमेटी ने यह तक कहा है कि दौसा आरटीओ की ओर से बार-बार लिखित व मौखिक निर्देश दिए जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आना भी गंभीर है।

Updated on:
31 Oct 2025 09:04 am
Published on:
31 Oct 2025 09:02 am
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