राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल से झूठे बातें कहलवाई गईं, जिसे सुनकर किरोड़ीलाल मीणा हंस रहे थे।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के अभिभाषण को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अभिभाषण पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “झूठ का पुलिंदा” करार दिया और कहा कि सरकार ने जमीन पर कोई ठोस काम नहीं किया है, सिर्फ आंकड़ों और दावों का सहारा लिया गया है।
जूली ने कहा कि अभिभाषण के दौरान कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा मुस्कराते नजर आए, क्योंकि वे स्वयं जानते हैं कि राज्यपाल से ऐसे मुद्दों पर बातें कहलवाई गईं, जिन पर सरकार का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईआरसीपी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्यपाल ने कुछ नहीं कहा, क्योंकि इस योजना में अब तक कोई वास्तविक प्रगति नहीं हुई है। इसी तरह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर भी सिर्फ घोषणाएं हैं, काम धरातल पर नजर नहीं आता।
कानून-व्यवस्था को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध बढ़ रहे हैं, समर्थन मूल्य पर किसानों की उपज की खरीद नहीं हो रही और लखपति दीदी योजना में दिए गए ऋण को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। जूली ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और अभिभाषण में सच्चाई से ज्यादा दिखावा है।
बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने मनरेगा का नाम बदलने और ‘राइट टू वर्क’ के अधिकार के कमजोर होने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में विधायक हाथों में फावड़ा, गैंती और तगारी लेकर पैदल मार्च करते नजर आए। जूली ने कहा कि मजदूरों से काम का अधिकार छीना जा रहा है और ऐतिहासिक कानून को खत्म करने की साजिश रची जा रही है।
परिसीमन के मुद्दे पर भी उन्होंने बीजेपी को घेरा और कहा कि गलत तरीके से परिसीमन किया जा रहा है, जिससे जनता को भ्रमित किया जा रहा है। बाड़मेर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले जो दूरी 70 किलोमीटर थी, वह अब बढ़कर 170 किलोमीटर हो गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होगी।
उधर, राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार ने एक लाख भर्तियों का कैलेंडर, 11 करोड़ से अधिक पौधारोपण, निवेश प्रस्तावों, किसानों, महिलाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को अपनी उपलब्धि बताया। हालांकि, विपक्ष ने इन दावों को कागजी बताते हुए सरकार की नीयत और नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए।