Dam Renovation: मुख्य अभियंता ने किया निरीक्षण, गूलर बांध पर तेज़ी से चल रहा पुनरुद्धार कार्य। जयपुर का गूलर बांध बनेगा नया आकर्षण, गेट और गार्डन से होगा कायाकल्प।
Guler Dam: जयपुर. राजधानी जयपुर के सांगानेर क्षेत्र स्थित द्रव्यवती नदी पर बने गूलर बांध का स्वरूप जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बजट घोषणा के तहत जल संसाधन विभाग ने इस ऐतिहासिक बांध के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य तेज़ी से शुरू कर दिया है। करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से गूलर बांध को न केवल पुनर्जीवित किया जा रहा है, बल्कि इसे एक आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के निर्देशन में विभाग ने परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर कार्यादेश जारी कर दिया है। इसी क्रम में विभाग के मुख्य अभियंता एवं अतिरिक्त सचिव भुवन भास्कर ने शनिवार को गूलर बांध का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता सुरेश खतानिया, अधीक्षण अभियंता रमाशंकर और अधिशासी अभियंता अनिल थालौर भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, नियमित जांच करने और सभी दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने बांध के ओवरफ्लो स्ट्रक्चर की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए इसके तकनीकी पुनःडिजाइन और नए निर्माण के निर्देश भी दिए।
परियोजना के तहत गूलर बांध को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए यहां आकर्षक घाट, हरित उद्यान और सुंदर लैंडस्केपिंग की योजना बनाई गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दीर्घकालिक और समग्र लैंडस्केपिंग प्लान तैयार करें, जिससे यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।
अधिशासी अभियंता अनिल थालौर ने जानकारी दी कि बरसात के दौरान अतिरिक्त जल प्रवाह से उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए बांध पर आधुनिक गेट लगाए जाएंगे। इससे नहरों में जल प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकेगा और जल प्रबंधन बेहतर होगा। इसके साथ ही चंदलाई की ओर जाने वाली नहर के दोनों किनारों पर सुरक्षा दीवार का निर्माण भी किया जाएगा।
गौरतलब है कि जल संसाधन विभाग प्रदेश के प्रमुख बांधों—कानोता, नेवटा, चंदलाई और गूलर—के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण की व्यापक योजना पर काम कर रहा है। इन प्रयासों से जहां सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं मानसून के दौरान जल निकासी और प्रबंधन की समस्याओं का भी स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।