जयपुर

Vasundhara Raje : ‘मुझे पुरुष प्रधान समाज सुनना कभी अच्छा नहीं लगा’, ऐसा क्यों बोलीं वसुंधरा राजे?

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज और 'महिला शक्ति' के पक्ष में दिए गए अपने बयानों को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं।
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Feb 28, 2026
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राजस्थान की सियासत में 'आयरन लेडी' मानी जाने वाली पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को जयपुर में आयोजित Confederation of Women Entrepreneurs of India के अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में शिरकत की। यहाँ उन्होंने न केवल महिला उद्यमियों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि समाज के ताने-बाने पर भी गंभीर सवाल उठाए। राजे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें 'पुरुष प्रधान समाज' शब्द अच्छा नहीं लगता है।

'पुरुष को जन्म देने वाली नारी, फिर समाज पुरुष प्रधान क्यों?'
वसुंधरा राजे ने मंच से अपनी भावनाओं को साझा करते हुए कहा कि वे बचपन से एक ही सवाल से जूझती आई हैं। उन्होंने कहा, "मुझे यह सुनना कभी भी अच्छा नहीं लगा कि हमारा समाज पुरुष प्रधान है। जबकि हकीकत यह है कि पुरुष को जन्म देने वाली तो नारी ही है। तो फिर प्रधानता पुरुषों की ही क्यों? महिला प्रधान समाज क्यों नहीं हो सकता?"

राजे ने कहा कि किसी भी सफल महिला को उस मुकाम तक पहुँचने के लिए पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा मेहनत, समय और समर्पण देना पड़ता है।


2008 का वो ऐतिहासिक फैसला: जब 'मुखिया' बनी महिला

राजे ने अपने मुख्यमंत्री काल की उन योजनाओं को याद किया जिन्होंने राजस्थान में महिला सशक्तिकरण की बुनियाद रखी:

भामाशाह योजना: "मैंने 2008 में भामाशाह योजना इसलिए शुरू की थी ताकि राशन कार्ड और परिवार के दस्तावेजों में महिला का नाम 'मुखिया' के तौर पर दर्ज हो। यह समाज को 'महिला प्रधान' बनाने की दिशा में मेरा एक बड़ा प्रयास था।"

50% आरक्षण: पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के अपने क्रांतिकारी निर्णय को भी उन्होंने महिला नेतृत्व की जीत बताया।

'लखपति दीदी' और मोदी सरकार की योजनाओं की सराहना

राजे ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही योजनाओं को महिला उद्यमिता के लिए टर्निंग पॉइंट बताया:

वित्तीय स्वतंत्रता: #LakhpatiDidi, #PMMUDRA, और #StandUpIndia जैसी योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि 'इकोनॉमी मेकर' बना दिया है।

भविष्य की अर्थव्यवस्था: राजे के अनुसार, आज की महिलाएं केवल पारंपरिक व्यापार नहीं कर रहीं, बल्कि वे डिजिटल और AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के क्षेत्र में भी भविष्य की अर्थव्यवस्था गढ़ रही हैं।

"महिलाएं इकॉनमी में प्रवेश नहीं कर रहीं, उसे रीडिजाइन कर रही हैं"

राजे ने समिट के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और इंडस्ट्री लीडर्स की एकजुटता को देख प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "भारतीय महिला कार्यबल की कहानी लचीलेपन और पुनरुत्थान की है। महिलाएं संस्कृति को वाणिज्य में और स्थिरता को रणनीति में बदल रही हैं। जब महिलाएं जुड़ती हैं, तो पूरा ईकोसिस्टम विकसित होता है।"

सफल महिलाओं की जिम्मेदारी पर राजे का संदेश

राजे ने उन महिलाओं को भी प्रेरित किया जो ऊंचे पदों पर पहुँच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं शक्ति की स्थिति में हैं, उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने पीछे आने वाली दूसरी महिलाओं का रास्ता आसान करें।

Updated on:
28 Feb 2026 04:09 pm
Published on:
28 Feb 2026 04:09 pm