
अजमेर। अजमेर की घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल में बैरक के अंदर डकैत जगन गुर्जर की एक अन्य बंदी विष्णु ने 29 जून को गला घोंटकर हत्या कर दी। राजस्थान, एमपी और यूपी में खौफ का पर्याय रहे चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर पर करीब 128 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें आधे से ज्यादा मामले हत्या, मर्डर के प्रयास, लूट, अपहरण और डकैती के थे। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने जून 2019 में जगन गुर्जर के एनकाउंटर की मांग उठाई थी। अजमेर के सिविल लाइंस थाना प्रभारी शम्भू सिंह शेखावत ने बताया कि हाई सिक्योरिटी जेल उप अधीक्षक की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। प्रथमदृष्ट्या गमछे से गला घोंटकर जगन गुर्जर की हत्या की गई है। प्रकरण में अनुसंधान किया जा रहा है।
जगन गुर्जर सोमवार दोपहर करीब 3 बजे राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में बेसुध हालत में मिला था। गार्ड्स ने कई बार उसका नाम पुकारा, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर वे बैरक में दाखिल हुए। बाद में जेल के डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। जगन गुर्जर के शव को जेएलएन अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच मुर्दाघर में रखा गया है। घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं । जेल सूत्रों का कहना है कि हत्या की वजह गैंग की आपसी दुश्मनी नहीं, बल्कि निजी रंजिश लग रही है।
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के एक गार्ड ने बताया कि इसमें कोई गैंग शामिल नहीं थी और शायद ही कोई जगन से बातचीत करता था। बैरक में रहने वाले विष्णु जाट (29) के साथ जगन गुर्जर (50) की अक्सर आपराधिक वर्चस्व को लेकर झड़प होती थी। विष्णु 2023 में भरतपुर में गैंगस्टर कुलदीप जघीना की हत्या के बाद चर्चा में आया था। बैरक से विष्णु का एक तौलिया बरामद किया गया है। सूत्रों ने बताया कि दूसरे कैदियों के बयान भी दर्ज किए गए, लेकिन किसी ने भी गैंग की आपसी दुश्मनी की ओर इशारा नहीं किया।
जगन गुर्जर के खिलाफ पहला केस 1994 में दर्ज किया गया था। 2015 में राजस्थान के सबसे खतरनाक अपराधियों को रखने के लिए अजमेर में राजस्थान की हाई सिक्योरिटी जेल खुलने के बाद से इस जेल में हत्या का यह पहला मामला है। गैंगस्टर आनंदपाल सिंह और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कई सदस्य भी इसी जेल में रखे गए हैं। मंगलवार को जगन गुर्जर का शव अंतिम संस्कार के लिए धौलपुर जिले में उनके पैतृक गांव भवुतीपुरा ले लाया जाएगा।
जेल स्टाफ व पुलिस अधिकारियों ने जब विष्णु से बैरक के भीतर की घटना के बारे में पूछा तो उसने कथित तौर पर जगन गुर्जर की हत्या की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया। विष्णु ने कहा कि जगन गुर्जर लगातार मेरा मजाक उड़ाता था। छोटी-छोटी बातों पर ताने मारता था। इन बातों से मैं लंबे समय से आहत था और मन ही मन जगन को मारने का फैसला कर लिया था।
मुझे सही मौके का इंतजार था। विष्णु ने जगन का गमछे से गला घोंटने के बाद हाथों से भी गला भींचा था। ताकि उसके बचने की उम्मीद ना रहे। उसको पता था कि जगन बच गया तो उसकी मौत निश्चित है। जगन को मारकर उसके शव के पास विष्णु आराम करता रहा। सोमवार दोपहर 3 बजे जब रोजाना की तरह सेल खोली गई तो वह मुस्कुराते हुए सेल से बाहर निकला।