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भांजी को डाउन सिंड्रोम से जूझते देखा तो मिली सेवा की प्रेरणा; 18 साल से विशेष बच्चों का जीवन संवार रहीं योगिता माथुर

Special Educator : भांजी को डाउन सिंड्रोम से जूझते देखकर योगिता माथुर ने विशेष बच्चों के लिए काम करने का फैसला किया। वे 18 साल से बच्चों और उनके परिवारों की मदद कर रही हैं।
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yogita mathur inspirational story

स्पेशल बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनी योगिता माथुर (Photo-Patrika)

जयपुर। कभी अपनी भांजी को डाउन सिंड्रोम जैसी विशेष परिस्थिति से गुजरते देख एक महिला के मन में कई सवाल उठे। उस अनुभव ने उन्हें केवल भावुक ही नहीं किया, बल्कि समाज में विशेष बच्चों और उनके परिवारों की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर भी दिया। यही संवेदना आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य बन गई। आज स्पेशल एजुकेटर और करुणा स्पर्श फाउंडेशन की संस्थापक योगिता माथुर विशेष बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए प्रेरणा, सहयोग और विजस का मजबूत आधार बन चुकी हैं।

संवेदना से सेवा तक का सफर

योगिता माथुर की यह यात्रा किसी पूर्व नियोजित लक्ष्य का परिणाम नहीं थी। अपनी भांजी को डाउन सिंड्रोम के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए देखकर उन्होंने महसूस किया कि ऐसे बच्चों के साथ-साथ उनके परिवारों को भी समाज में जागरूकता की कमी, उपेक्षा और कई तरह की व्यावहारिक कठिनाइयों से जूझना पड़ता है।

इस अनुभव ने उन्हें विशेष शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पेशल एजुकेशन का प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपना जीवन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित कर दिया। उनका उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास विकसित कर उन्हें आत्मनिर्भर जीवन के लिए तैयार करना था।

18 वर्षों से विशेष बच्चों के जीवन में नई उम्मीद

पिछले करीब 18 वर्षों से योगिता माथुर विशेष बच्चों के शैक्षणिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने करुणा स्पर्श फाउंडेशन की स्थापना की, जो आज विशेष बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक भरोसेमंद सहयोग केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है। संस्था में बच्चों की व्यक्तिगत क्षमताओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही अभिभावकों को यह समझाया जाता है कि विशेष बच्चे किसी भी दृष्टि से बोझ नहीं हैं, बल्कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर वे भी अपनी प्रतिभा के बल पर समाज में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
योगिता माथुर का मानना है कि हर बच्चे के भीतर कोई न कोई विशेष क्षमता होती है। आवश्यकता केवल उस प्रतिभा को पहचानने, उसे निखारने और सही दिशा देने की है। उनके मार्गदर्शन और सतत प्रयासों से अनेक विशेष बच्चों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं और अपने परिवारों के जीवन में नई आशा का संचार किया है।

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