Wedding In LPG Crisis: शादियों की बढ़ती संख्या के बीच गैस सिलेंडर की कमी ने मध्यमवर्गीय परिवारों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहले जहां 5-6 महीने पहले तय किए गए मेन्यू में 20 से 22 व्यंजन शामिल होते थे, अब यह घटकर 12 से 15 आइटम तक सीमित रह गया।
Wedding Season Started: खरमास समाप्त होते ही मंगलवार से शहर में शादी समारोहों की रौनक एक बार फिर तेज हो जाएगी। वेडिंग सीजन को लेकर अधिकांश गार्डन और मैरिज हॉल पहले ही लगभग 90 प्रतिशत तक बुक हो चुके हैं, जिससे आयोजनों की व्यस्तता का अंदाजा लगाया जा सकता है। 19 अप्रेल को अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा आगामी 33 दिनों में तीन अबूझ मुहूर्त सहित कुल 11 सावे उपलब्ध हैं, जिनमें बड़ी संख्या में विवाह संपन्न होने की संभावना है। इसके बाद 17 मई से 15 जून तक अधिकमलमास के चलते शादियों पर अस्थायी विराम रहेगा, जिससे आयोजन गतिविधियों में कमी आएगी।
वहीं शादियों की बढ़ती संख्या के बीच गैस सिलेंडर की कमी ने मध्यमवर्गीय परिवारों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहले जहां 5-6 महीने पहले तय किए गए मेन्यू में 20 से 22 व्यंजन शामिल होते थे, अब यह घटकर 12 से 15 आइटम तक सीमित रह गया है। अधिक गैस खपत वाले व्यंजन जैसे तवा रोटी और पूरी को कई जगह सीमित मात्रा में या बैच के आधार पर परोसा जा रहा है। इसके साथ ही, कुछ आयोजनों में पारंपरिक लकड़ी की भट्टियों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि खाना बनाने में गैस की खपत को कम किया जा सके और व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चलती रहें।
ऑल वेडिंग इंडस्ट्री फेडरेशन राजस्थान के महामंत्री भवानी शंकर माली समेत अन्य ने बताया कि अगले करीब एक माह में शहर में सात हजार से अधिक शादियां होने का अनुमान है। वहीं जयपुर कैटरिंग डीलर्स समिति के अध्यक्ष मनोज सेवानी ने कहा कि गैस की कमी के चलते कैटरर्स को मेन्यू में बदलाव करना पड़ रहा है। शादियों के मेन्यू में अब गर्म व्यंजनों की जगह ठंडे आइटम का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मेन्यू में सलाद, रायता, ठंडी मिठाइयां, शरबत, आइसक्रीम और कोल्ड डेजर्ट को ज्यादा शामिल किया जा रहा है। इससे गैस की खपत कम होती है और मेहमानों को भी पर्याप्त विकल्प मिल जाते हैं।
20, 21, 26, 29 और 30 अप्रेल,
5, 6, 7, 8, 10 और 14 मई,
अबूझ मुहर्त: 19, 25 अप्रेल और 1 मई। (ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रमोहन दाधीच के अनुसार)