जयपुर

वीकली प्लान की खबर, आज ही लगेगी::::एंकर…फ्लायर…फोटो है:::::तहसील भवन की छतों पर शोपीस बने वर्षामापी यंत्र, दो साल से चालू होने का इंतजार

Aug 02, 2026
Rajasthan

बस्सी. मौसम विज्ञान और तकनीकी विकास के इस दौर में जहां हर सूचना कम्प्यूटर पर एक क्लिक में उपलब्ध हो रही है, वहीं जयपुर जिले की तहसीलों में पिछले वर्षों लगाए गए वर्षामापी यंत्र दो वर्षों से धूल फांक रहे हैं। मौसम विभाग की ओर से प्रत्येक तहसील मुख्यालय के भवन की छतों पर वर्षा मापन के लिए आधुनिक उपकरण तो स्थापित कर दिए गए, लेकिन इन्हें आज तक चालू नहीं किया जा सका है, इससे पुरानी पद्धति से बरसात मापी जा रही है। हालात यह है, कि ये यंत्र अब शोपीस बनकर रह गए हैं और इनका उद्देश्य अधूरा पड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल वर्षामापी यंत्रों के सही तरीके से संचालन से मौसम संबंधी पूर्वानुमान अधिक सटीक हो सकते हैं। इससे किसानों को समय पर फसल प्रबंधन में सहायता मिलती, वहीं प्रशासन को बाढ़ या सूखे जैसी स्थितियों से निपटने में भी मदद मिलती।

डेटा सीधे ऑनलाइन सर्वर पर अपलोड होना था::::
जानकारी के अनुसार करीब दो वर्ष पहले विभाग ने डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने और वर्षा के सटीक आंकड़े ऑनलाइन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बस्सी समेत प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर आधुनिक वर्षामापी यंत्र लगाए थे। इन यंत्रों के माध्यम से बरसात का डेटा सीधे ऑनलाइन सर्वर पर अपलोड होना था, जिससे प्रशासन, किसान और आमजन को रियल टाइम जानकारी मिल सके। लेकिन योजना की शुरुआत के बाद से ही यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
स्थिति यह है कि बस्सी, तूंगा, आंधी, जमवारामगढ़़ सहित कई तहसीलों में इन यंत्रों में अब तक इंटरनेट कनेक्शन तक नहीं किया गया है। जहां कनेक्शन है भी, वहां तकनीकी खामियों के कारण यंत्र चालू नहीं हो पा रहे हैं। परिणामस्वरूप आज भी वर्षा का मापन पारंपरिक पद्धति से ही किया जा रहा है। कर्मचारी मैन्युअली वर्षा का आंकड़ा दर्ज कर उसे उच्च अधिकारियों को भेजते हैं, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि डेटा की सटीकता पर भी सवाल उठते हैं।

शुरू से पुरानी पद्धति से ही नापी है... तहसील में जिस कर्मचारी को मानसूनी सीजन में बरसात नापने का काम सौंप रखा है, उसने बताया कि मौसम ने विभाग ने दो वर्ष पहले नया वर्षामापी यंत्र लगा तो दिया, लेकिन अभी तक चालू नहीं किया गया है। उनको पुराने यंत्र में ही बरसात मापनी पड़ती है।

लकड़ी की सीढी से चढ़ना पड़ता है::: चिंता की बात तो यह है कि बस्सी उपखण्ड कार्यालय एवं तहसील भवन पर सीढियां ही नहीं है। जब कर्मचारी को लकड़ी की सीढ़ी पर चढ़ कर भवन की छत पर रखे जार में से बरसात नापनी पड़ रही है। ऐसे में चढ़ते- उतरते वक्त हादसा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। (कासं )
फोटो केप्शन - बस्सी तहसील पर शैपीस बन खड़ा है नया वर्षामापी यंत्र।

Updated on:
02 Aug 2026 06:00 am
Published on:
02 Aug 2026 06:00 am