Rajasthan High Court : राजस्थान के हल्दीघाटी दर्रा और रक्ततलाई जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर बढ़ते अतिक्रमण और उपेक्षा पर मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। इन पर अपनी चिंता जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर नए निर्माणों पर रोक लगा दी है।
Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास के प्रतीक हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई की दुर्दशा पर स्वतः संज्ञान लिया। स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ पुरातत्व विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया है।
न्यायाधीश पीएस भाटी और संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई स्थलों पर नए निर्माण करने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा खुले सीवरेज के बहाव को मोड़ने और जलभराव की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। इन स्थलों की सुरक्षा के लिए 24×7 निगरानी व्यवस्था की जाएगी।
रिपोर्ट में सामने आया कि हल्दीघाटी में चौड़ीकरण के दौरान 200 से अधिक पेड़ काटे गए। पहाड़ियों को समतल किया गया। जिससे संभावित पुरातात्विक अवशेष दब गए। रक्त तलाई में गंदगी, शराब की बोतलें और अवैध अतिक्रमण मिले।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 2024 के बजट में घोषित 100 करोड़ रुपए की 'महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट' योजना केवल कागजों तक ही सीमित क्यों है? अधिवक्ता निखिल भंडारी ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि धरोहरों की रक्षा के लिए अवैध अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसमें कोर्ट की अनुमति के बिना इन स्थलों पर किसी भी नए निर्माण या विस्तार पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है। 15 दिनों के भीतर कचरा, खरपतवार और गंदगी हटाने का विशेष अभियान चलाया जाए। स्थलों के दुरुपयोग को रोकने के लिए 24 घंटे सुरक्षा और कार्यवाहकों की नियुक्ति की जाए। ऐतिहासिक ढलानों पर पार्किंग प्रतिबंधित की जाए। गंदगी फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
राजसमन्द और पाली जिलों को जोड़ने वाले हल्दीघाटी दर्रा वो स्थान है, जहां पर महाराणा प्रताप और अकबर के बीच युद्ध हुआ था। वहीं रक्त तलाई छोटी खमनोर स्थित वह खुला मैदान है जहां युद्ध में इतना रक्तपात हुआ कि खून की एक तलैया (तालाब) भर गई थी, जिस वजह से उसका नाम 'रक्त तलाई' पड़ा।
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