ओपन जेल को सजा से ज्यादा सुधार का माध्यम माना जाता है। यहां न तो ऊंची दीवारें होती हैं, न लोहे की सलाखें और न ही हथियारबंद पहरा।
Rajasthan Open Jail Unique Love story: राजस्थान में ओपन जेल या ओपन एयर कैंप व्यवस्था इन दिनों एक चौंकाने वाली प्रेम कहानी को लेकर चर्चा में है। यहां एक हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रही प्रिया सेठ और पांच लोगों की हत्या के दोषी हनुमान प्रसाद के बीच पनपा प्यार अब शादी तक पहुंच गया है। यह कहानी सुनने में किसी टीवी क्राइम शो जैसी लगती है, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि में राजस्थान की अनोखी ओपन जेल प्रणाली है।
ओपन जेल को सजा से ज्यादा सुधार का माध्यम माना जाता है। यहां न तो ऊंची दीवारें होती हैं, न लोहे की सलाखें और न ही हथियारबंद पहरा। राजस्थान प्रिजनर्स ओपन एयर कैंप रूल्स, 1972 के तहत संचालित ये जेलें विश्वास और आत्म-अनुशासन पर आधारित हैं। अच्छे आचरण वाले कैदियों को यहां स्थानांतरित किया जाता है, ताकि वे समाज से पूरी तरह कटे बिना सामान्य जीवन जी सकें।
ओपन जेल में कैदी अपने परिवार के साथ घर जैसी यूनिट में रह सकते हैं। उन्हें दिन में काम पर जाने की अनुमति होती है और शाम को निर्धारित समय पर हाजिरी देना अनिवार्य होता है। यहां कैदियों को जेल की वर्दी पहननी जरूरी नहीं होती, वे सामान्य कपड़े पहनते हैं और सीमित शर्तों के साथ मोबाइल फोन का भी उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, अनुशासन टूटने पर उन्हें दोबारा बंद जेल भेज दिया जाता है।
जयपुर जिले की डीजे कोर्ट ने 24 नवंबर 2023 को दुष्यंत शर्मा हत्याकांड में प्रिया सेठ को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जांच में सामने आया था कि प्रिया ने अपने प्रेमी के कर्ज से उबारने के लिए दुष्यंत को डेटिंग ऐप के जरिए प्रेम जाल में फंसाया, ब्लैकमेल किया और फिरौती लेने के बाद उसकी हत्या कर दी। शव को सूटकेस में भरकर फेंक दिया गया था।
वहीं, हनुमान प्रसाद को 2017 में हुए एक जघन्य हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था, जिसमें उसने एक व्यक्ति, उसके तीन बच्चों और एक भतीजे की हत्या कर दी थी। कोर्ट ने उसे भी 2023 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोनों कैदी वर्तमान में ओपन एयर कैंप में सजा काट रहे थे, जहां उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं और अब शादी का फैसला लिया गया है।
राजस्थान में देश की सबसे ज्यादा ओपन जेलें संचालित हो रही हैं। देश में लगभग 70 से ज्यादा ओपन जेल हैं। इनमें से करीब तीस राजस्थान में हैं। राजस्थान के इस मॉडल को देश के कई राज्यों ने अपनाया है। ओपन जेल में सजायाफ्ता कैदियों को ही भेजा जाता है। जेल में भेजने के कुछ नियम हैं, जिनमें अच्छा व्यवहार सबसे ज्यादा प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल कैदियों के मानसिक सुधार, पुनर्वास और समाज से दोबारा जुड़ने में मददगार साबित हुआ है, हालांकि कई बार इन ओपन जेल से भी कैदी फरार हो जाते हैं, बाद में उनके खिलाफ केस दर्ज होता है।