जयपुर

राजस्थान में क्या है ‘राज उन्नति’: जिसकी सरकार हुई मुरीद, विकास परियोजनाओं को मिलेगी गति

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने विकास परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार को खत्म करने के लिए 'राज-उन्नति' (Raj-UNNATI) पोर्टल लांच किया है। केंद्र सरकार के PRAGATI मॉडल पर आधारित इस पहल की कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने जमकर सराहना की है। राजस्थान इस तकनीक को अपनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
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Jan 26, 2026
What is Raj Unnati in Rajasthan
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास (पत्रिका फाइल फोटो)

Raj UNNATI Portal Rajasthan: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने सुशासन और विकास कार्यों की निगरानी के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार के PRAGATI (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) मॉडल की तर्ज पर राजस्थान ने 'राज-उन्नति' (Raj-UNNATI) नाम से एक नया प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया है। इस पहल की केंद्र सरकार ने जमकर सराहना की है।

कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को पत्र लिखकर इस नवाचार की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि राजस्थान ने 'प्रगति' मॉडल को अपनाते हुए 'राज-उन्नति' की शुरुआत की है।

क्या है 'राज-उन्नति' और यह कैसे करेगा काम?

अक्सर देखा जाता है कि बजट और मंजूरी होने के बावजूद सरकारी प्रोजेक्ट्स फाइलों में अटके रहते हैं या आपसी समन्वय की कमी से देरी होती है। 'राज-उन्नति' एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए मुख्यमंत्री खुद सीधे प्रोजेक्ट्स की निगरानी करेंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से समीक्षा: इसमें मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ते हैं।

अटके प्रोजेक्ट्स का समाधान: इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की उन योजनाओं और परियोजनाओं को गति देना है जो किसी कारणवश रुकी हुई हैं।

जवाबदेही तय करना: इसमें केवल चर्चा नहीं होती, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए समय सीमा (Timeline) तय की जाती है।

राजस्थान बना देश का पहला राज्य

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 दिसंबर 2025 को हुई 'प्रगति' बैठक में राज्यों से इस मॉडल को अपनाने का आह्वान किया था। राजस्थान इस मॉडल को 'राज-उन्नति' के रूप में लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में 17 जनवरी को 'राज-उन्नति' की पहली बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में करीब 1,943 करोड़ रुपए की लागत वाले सात बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई और उनके मार्ग में आ रही बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए गए।

डिजिटल ट्रैकिंग और CMIS पोर्टल

इस सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया गया है, जिसे मुख्यमंत्री सूचना प्रणाली (CMIS) नाम दिया गया है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री जो भी निर्देश देते हैं, उन्हें तुरंत पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता है। एक ऑनलाइन ट्रैकर के जरिए यह देखा जाता है कि काम तय समय पर पूरा हो रहा है या नहीं। अगर कहीं देरी होती है, तो सिस्टम खुद ही संबंधित अधिकारी को अलर्ट भेज देता है।

क्यों जरूरी है यह मॉडल?

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी के लिए 'प्रगति' की शुरुआत की थी। पिछले एक दशक में इसके जरिए 85 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स को गति मिली है।

आंकड़ों के अनुसार, 'प्रगति' के माध्यम से उठाए गए 94% मुद्दों का समाधान किया गया है, जिससे प्रोजेक्ट्स की लागत में होने वाली बढ़ोतरी और देरी में भारी कमी आई है। अब राजस्थान भी इसी राह पर चल पड़ा है। 'राज-उन्नति' के जरिए राज्य में सड़कों, बांधों, स्कूलों और अस्पतालों जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स अब समय पर पूरे हो सकेंगे, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।

Updated on:
26 Jan 2026 02:04 pm
Published on:
26 Jan 2026 02:04 pm