जयपुर

Swami Rambhadracharya : कौन हैं जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य? जानिए उनके बारे में रोचक जानकारियां

Swami Rambhadracharya : जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य कौन हैं? जानिए उनके बारे में कुछ रोचक जानकारियां?

3 min read
जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य। फोटो - ANI

Swami Rambhadracharya : दुनियाभर में मशहूर राजस्थान की गुलाबी सिटी जयपुर के नींदड़ में आजकल विख्यात संत जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य हैं। नींदड़ में राम कथा और 1008 कुंडीय महायज्ञ हो रहा है। यह कार्यक्रम रामानंद मिशन की ओर से कराया जा रहा है। इस कार्यक्रम में स्वामी रामभद्राचार्य का 77वां जन्मदिन भी मनाया जा रहा है। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य कौन हैं, आखिरकार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु क्यों जयपुर आ रही हैं।

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य श्रेष्ठ राम कथावाचक हैं। रामानंद संप्रदाय के 4 जगद्गुरु रामानंदाचार्यों में एक रामभद्राचार्य भी हैं। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के शांडीखुर्द गांव में मकर संक्रांति के दिन 14 जनवरी 1950 को गिरिधर मिश्र यानि रामभद्राचार्य का जन्म एक सरयूपारी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पिता का नाम राजदेव मिश्रा व मां शचीदेवी थी। ऐसा कहा जाता है कि चचेरी दादी मीरा बाई की बड़ी भक्त थी और इसी वजह से रामभद्राचार्य को गिरिधर नाम से पुकारा जाता था।

ये भी पढ़ें

SIR Update : SIR पर चुनाव आयोग का नया अपडेट, राजस्थान के वोटरों को मिली बड़ी राहत

दो माह की आयु में चली गई थी आंखों की रोशनी

गिरिधर यानि रामभद्राचार्य की दो माह की आयु में आंखों की रोशनी चली गई थी। आंखों की रोशनी चली गई पर ईश्वर ने रामभद्राचार्य को एक गुण दे दिया। वे एक बार जो सुन लेते थे वो फिर कभी भूलते नहीं थे। 5 साल की उम्र में उन्होंने 800 श्लोकों के साथ भगवद्गीता कंठस्थ कर ली। 8 साल की उम्र तक 10800 दोहों वाली रामचरित मानस भी कंठस्थ कर ली थी।

यूपी के जौनपुर जिले से है नाता

जौनपुर जिले के आदर्श गौरीशंकर संस्कृत महाविद्यालय से प्रारंभिक पढ़ाई पूरी करने के बाद रामभद्राचार्य ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से उच्च शिक्षा ग्रहण की। रामभद्राचार्य को 1974 में स्नातक समतुल्य शास्त्री फिर आचार्य (परस्नातक) की उपाधि भी ग्रहण की। दोनों परीक्षाओं में वो गोल्ड मेडलिस्ट रहे। 1976 में आचार्य बनने के बाद कुलाधिपति स्वर्ण पदक भी हासिल किया। रामभद्राचार्य ने 1981 में पीएचडी, 1997 में वाचस्पति (डीलिट) की उपाधि प्राप्त की।

गिरिधर मिश्रा का पड़ा गया नया नाम

रामभद्राचार्य की 19 नवंबर 1983 को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर रामानंद संप्रदाय में श्रीश्री 1008 रामचरणदास महाराज से दीक्षा ग्रहण की। बस इसके बाद ही गिरिधर मिश्रा का नया नाम रामभद्राचार्य पड़ा। वर्ष 1987 में चित्रकूट जिले में तुलसी पीठ की स्थापना की, जहां भगवान राम ने अपने वनवास के 14 में से 12 वर्ष बिताए थे।

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य व सीएम भजनलाल व अन्य। फोटो - ANI

राम जन्मभूमि केस में दर्ज कराया था ऐतिहासिक बयान

रामभद्राचार्य ने 22 भाषाओं में विशेषज्ञता हासिल की। रामभद्राचार्य ने लगभग 80 धर्म ग्रंथों की रचना की है। अब तक कुल 240 से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं। रामभद्राचार्य ने राम जन्‍मभूमि केस में सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक बयान दर्ज कराया था। इसके साथ ही तुलसीदास की हनुमान चालीसा में कई सुधार किए।

वो हैं दिव्यांग विश्‍वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने चित्रकूट जिले में दिव्यांग विश्‍वविद्यालय की स्थापना की। इस विश्वविद्यालय के वो आजीवन कुलाधिपति बनाए गए हैं। तुलसी पीठ के अलावा कांच मंदिर, सीताराम गौशाला भी बनाया है। रामभद्राचार्य ने संस्कृत और हिंदी में कुल 4 महाकाव्य टीकाएं भी लिखे हैं। केंद्र सरकार ने 2015 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज आएंगी जयपुर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर जयपुर पहुंचेंगी। वे यहां रामानंद मिशन की ओर से नींदड़ में जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य के सान्निध्य में आयोजित रामकथा व 1008 कुंडीय हनुमत महायज्ञ के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगी।

राजस्थान से जुड़ी हर ताज़ा खबर, सीधे आपके WhatsApp पर
जुड़ें अभी
: https://bit.ly/4bg81fl

ये भी पढ़ें

Jaipur Real Estate : जयपुर में रियल एस्टेट में नया ट्रेंड, शहर के बाहर खरीद रहे फार्महाउस और बड़े प्लॉट्स, जानें क्यों?

Updated on:
16 Jan 2026 11:51 am
Published on:
16 Jan 2026 11:45 am
Also Read
View All

अगली खबर