जयपुर

प्लास्टिक थैलियों की बिक्री जारी क्यों

कलक्टरों और नगर निकायों से मांगा शपथ पत्र
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May 03, 2018
Jaipur News

जयपुर . हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 2010 में अधिसूचना जारी करने के बावजूद प्लास्टिक थैलियों पर पाबंदी नहीं लगने पर तल्खी दिखाते हुए सभी जिला कलक्टर व नगर निकाय आयुक्तों से 10 दिन में शपथ पत्र मांगा है। शपथ पत्र में यह बताने को कहा है कि सरकार की अधिसूचना कागजी क्यों बनी है और पाबंदी लगाने के लिए क्या प्रयास किए गए? साथ ही, कहा कि उपयोग करने वालों के चालान हों और शपथ पत्र झूठे निकलने पर मुकदमे चलाए जाएंगे। सुनवाई 15 मई तक टालते हुए कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है।

न्यायाधीश मनीष भण्डारी व न्यायाधीश दिनेश चन्द्र सोमानी की खण्डपीठ ने स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका, प्लास्टिक मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन की याचिका पर बुधवार को यह अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल पर वन संरक्षण अधिनियम के तहत पाबंदी को लेकर 23 मार्च 2014 को हाईकोर्ट ने स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया। सरकार ने पाबंदी के लिए 14 मई व 21 जुलाई 2010 को अधिसूचना जारी की और केन्द्र ने भी पाबंदी की मंशा जताई। कोर्ट ने अति. महाधिवक्ता एसके गुप्ता को कार्रवाई का रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।

फिर बिक्री कैसे

कोर्ट ने कहा कि जब राज्य सरकार प्रदेश में प्लास्टिक की थैलियों पर पाबंदी लगाना चाहती है और अधिसूचना भी जारी हो चुकी है, फिर भी थैलियों का प्रयोग हो रहा है। सरकार के स्तर पर पालना में गभीर खामी के कारण अधिसूचना कागजी बनकर रह गई। कलक्टरों ने थैलियां जब्त कर मामले क्यों नहीं दर्ज कराए?

छ्व की खबरों पर लिया था प्रसंज्ञान

गायों के पेट में प्लास्टिक की थैलियां मिलने के बाद राजस्थान पत्रिका की ओर से इस मामले में अभियान के तौर पर समाचार श्रृंखला का प्रकाशन किया। इस पर कोर्ट ने स्वप्र्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया था।

कार्रवाई के निर्देश

पाबंदी के लिए सरकार की अधिसूचना की सख्ती से पालना हो, नहीं होने पर कार्रवाई की जाए। नगरीय निकाय अधिकारी बताएं कि कितने चालान किए और नहीं किए तो क्यों?

Published on:
03 May 2018 11:52 am