Wildlife Conservation: राजस्थान के सवाई माधोपुर में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर 11.5 किलोमीटर लंबा वन्यजीव ओवरपास बनाया गया है। इसके अलावा दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर वन्यजीव सुरक्षा उपायों का अध्ययन किया है।
Wildlife Corridor: जयपुर. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर वन्यजीव सुरक्षा उपायों का अध्ययन किया है। इस अध्ययन में सामने आया है कि हाईवे पर बनाए गए अंडरपास (सुरंग) जंगली जानवरों के लिए बहुत प्रभावी साबित हो रहे हैं। राजस्थान के सवाई माधोपुर में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर 11.5 किलोमीटर लंबा वन्यजीव ओवरपास बनाया गया है। एक तरफा यातायात (दिल्ली से कोटा दिशा) के लिए खोल दिया गया है।
अध्ययन गणेशपुर से अशारोड़ी के बीच 18 किलोमीटर लंबे हिस्से पर किया गया। कैमरों ने कुल 40,444 तस्वीरें कैद कीं, जिनमें 18 अलग-अलग वन्यजीव प्रजातियां दिखाई दीं। इन तस्वीरों में साफ देखा गया कि जंगली जानवर इन अंडरपास का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं और बिना किसी खतरे के हाईवे के नीचे से सुरक्षित रूप से पार कर पा रहे हैं। इससे साबित होता है कि सड़क निर्माण के समय वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखकर बनाए गए अंडरपास सही दिशा में काम कर रहे हैं।
इससे न सिर्फ जानवरों की जान बच रही है, बल्कि हाईवे पर वाहनों से होने वाली दुर्घटनाएं भी कम हो रही हैं।NHAI और WII के इस संयुक्त अध्ययन को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि भविष्य में अन्य राजमार्गों के निर्माण के समय भी ऐसे ही वन्यजीव-अनुकूल उपाय अपनाए जाएंगे।वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर किए गए इस काम ने दिखाया है कि सही योजना और तकनीक से दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है।
यह अध्ययन उन लोगों के लिए भी अच्छी खबर है जो हाईवे पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि देश के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी ऐसे अंडरपास और ओवरपास बनाए जाएंगे।
राजस्थान के सवाई माधोपुर में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर 11.5 किलोमीटर लंबा वन्यजीव ओवरपास एक तरफा यातायात (दिल्ली से कोटा दिशा) के लिए खोल दिया गया है। इसका फायदा यह होगा कि इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा और रणथंभौर, मुकुंदरा हिल्स और कुनो जैसे इलाकों को जोड़ने वाला पारिस्थितिक गलियारा बनेगा। शोर कम करने के लिए दीवारें और साउंड बैरियर, पेड़-झाड़ियाँ लगाई गई हैं। हर किलोमीटर पर कैमरे लगे हैं ताकि जानवरों की निगरानी हो सके। यह लगभग 900 करोड़ रुपए से बन रहा है। बाघ, भालू, चीतल, सांभर, नीलगाय आदि जानवर अब बिना खतरे के सड़क पार कर सकेंगे।
ओवरपास को प्राकृतिक रूप देने के लिए उनके पास बड़ी संख्या में पेड़-पौधे लगाने के साथ ही झाड़ियों से ढ़का गया है। एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ चार मीटर ऊंची दीवार बनाने के साथ ही दो मीटर ऊंचे ध्वनी अवरोधक लगाए गए हैं, जिससे वाहनों के शोर से जानवरों को परेशानी नहीं हो।