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NHAI की नई पहल: राजस्थान सहित 11 राज्यों के राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे बनेंगे ‘आरोग्य वन’

NHAI Green Initiative: एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर औषधीय वृक्षारोपण medicinal plantations के लिए ‘एनएचएआई आरोग्य वन’ 'NHAI Arogya Van' परियोजना शुरू करने जा रहा है।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Apr 09, 2026

Green Highways: जयपुर. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर औषधीय वृक्षारोपण medicinal plantations के लिए ‘एनएचएआई आरोग्य वन’ 'NHAI Arogya Van' परियोजना शुरू करने जा रहा है।

औषधीय पौधों की समृद्ध विरासत होगी संरक्षित

इस पहल का उद्देश्य राजमार्गों के आसपास पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना, परागणकों, पक्षियों और सूक्ष्मजीवों को सहारा देना तथा औषधीय पौधों की समृद्ध विरासत को संरक्षित करना है। ‘आरोग्यवन’ परियोजना के पहले चरण में कुल 62.8 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 17 भूखंडों को चिह्नित किया गया है।

लगभग ३६ प्रजातियों के औषधीय वृक्षों का किया चयन

इनमें मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित 11 राज्यों के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 67,462 औषधीय वृक्ष लगाए जाएंगे। लगभग 36 tree species प्रजातियों की औषधीय वृक्षों का चयन किया गया है, जिनमें नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर, मौलसरी आदि प्रमुख हैं। इन प्रजातियों को संबंधित क्षेत्र की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार लगाया जाएगा।

मानसून सीजन में वृक्षारोपण शुरू करने की तैयारी

टोल प्लाजा, इंटरचेंज, क्लोवरलीफ जंक्शन, वेज-साइड सुविधाओं और अन्य प्रमुख स्थानों के पास भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि जन जागरूकता अधिक से अधिक बढ़ सके। इस परियोजना का कार्यान्वयन भारत सरकार के भूनिर्माण और वृक्षारोपणदिशानिर्देशों के अनुरूप किया जाएगा। आगामी मानसून सीजन में वृक्षारोपण शुरू करने की तैयारी है।

परियोजना के फायदे

यह पहल पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है। औषधीय वृक्ष जैव विविधता बढ़ाएंगे, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखेंगे और कार्बन सिंक के रूप में कार्य करेंगे। यात्रियों को औषधीय पौधों के बारे में जानकारी मिलेगी, जिससे आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा मिलेगा। स्वदेशी औषधीय वनस्पतियों का संरक्षण होगा और स्थानीय समुदायों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही, राजमार्गों के किनारे हरित गलियारों का नेटवर्क बनेगा जो सड़क किनारे की पारिस्थितिकी को मजबूत करेगा। दीर्घकाल में यह हरित अवसंरचना का बेहतरीन उदाहरण बनेगा।

संभावित चुनौतियां

शुरुआती चरण में वृक्षों की जीवित रहने की दर सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर सूखे या अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में। रखरखाव की नियमित लागत आएगी। कुछ प्रजातियां धीरे बढ़ती हैं, इसलिए तत्काल प्रभाव दिखने में समय लग सकता है। यदि देखभाल में लापरवाही हुई तो पौधे नष्ट हो सकते हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में यह परियोजना ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ की भावना के अनुरूप पर्यावरण और स्वास्थ्य को जोड़ने का प्रयास है। NHAI के अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल भविष्य में और विस्तारित किया जाएगा। कुल मिलाकर ‘आरोग्यवन’ न केवल राजमार्गों को हरा-भरा बनाएगा, बल्कि भारत की औषधीय विरासत को जीवंत रखते हुए टिकाऊ विकास की मिसाल पेश करेगा।