जयपुर

राजस्थान यूथ कांग्रेस चुनाव में सियासी पारा चढ़ा : मेंबरशिप की जंग में पावर बनाम पैसे का खेल, 30 करोड़ तक खर्च

सूत्रों के मुताबिक चुनावी रणनीति को मजबूत बनाने के लिए कई दावेदारों ने पेशेवर एजेंसियों की मदद भी ली है। ये एजेंसियां दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहरों से जुड़ी बताई जा रही हैं।

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Mar 25, 2026
फाइल फोटो

जयपुर। राजस्थान में यूथ कांग्रेस के चुनाव शुरू होते ही प्रदेश की युवा राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सदस्यता अभियान से लेकर वोटिंग प्रक्रिया तक सब कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने के बावजूद इस चुनाव को ‘पावर और पैसे’ की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। संगठन के भीतर चर्चा है कि जो दावेदार अधिक संसाधन और नेटवर्क झोंक सकेगा, वही प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आगे निकल सकता है। अनुमान है कि इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में करीब 30 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकते हैं।

प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए फिलहाल 4-5 प्रमुख चेहरे मैदान में माने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सदस्यता अभियान ही इस चुनाव का सबसे अहम और खर्चीला हिस्सा बन गया है। युवा कांग्रेस का लक्ष्य करीब 20 लाख सदस्य बनाने का रखा गया है और एक सदस्य बनाने पर औसतन करीब 120 रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस हिसाब से केवल सदस्यता अभियान पर ही 24 से 25 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकते हैं।

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एजेंसियों की ली जा रही मदद

सूत्रों के मुताबिक चुनावी रणनीति को मजबूत बनाने के लिए कई दावेदारों ने पेशेवर एजेंसियों की मदद भी ली है। ये एजेंसियां दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहरों से जुड़ी बताई जा रही हैं। चुनाव प्रबंधन, सदस्यता अभियान और प्रचार के लिए इन एजेंसियों को 25 से 50 लाख रुपए तक की फीस दी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए 4 से 5 मजबूत दावेदारों के बीच मुकाबला माना जा रहा है और हर उम्मीदवार का कुल खर्च 6 से 10 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

युवा कांग्रेस चुनाव: एक नजर में

  • लक्ष्य सदस्य: 20 लाख
  • प्रति सदस्य खर्च: 120 रुपए (औसत)
  • कुल अनुमानित खर्च: 30 करोड़ रुपए
  • सदस्यता पर खर्च: 24-25 करोड़ रुपए
  • पद: 400 ब्लॉक, 200 विधानसभा, 50 जिलाध्यक्ष
  • प्रदेश अध्यक्ष के दावेदार: 4-5
  • प्रति दावेदार खर्च: 6-10 करोड़ रुपए
  • एजेंसियों की फीस: 25-50 लाख रुपए

मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में होने वाली है बैठक

प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होने के लिए दावेदारों का नाम पार्टी की परफॉर्मेंस लिस्ट में होना जरूरी है। इस सूची को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में बैठक होने वाली है। इस बैठक के बाद ही यह तय होगा कि कौन-कौन उम्मीदवार चुनाव लड़ने के पात्र होंगे। साथ ही दावेदार के लिए कम से कम 100 ब्लॉकों में अपने उम्मीदवार उतारना भी जरूरी होगा, जिससे उसकी संगठनात्मक पकड़ का आकलन किया जा सके।

तय समय से पहले चुनाव

दरअसल, पिछले कुछ समय से युवा कांग्रेस में अध्यक्ष और दो कार्यकारी अध्यक्षों के बीच कामकाज को लेकर विवाद की खबरें सामने आती रही हैं। इसी कारण इस बार चुनाव तय दो साल के कार्यकाल से पहले कराए जा रहे हैं। पार्टी भविष्य में टकराव कम करने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था समाप्त करने पर भी विचार कर रही है।

6-7 लाख वोट जुटाने की रणनीति

पिछले चुनाव में वोटों की जांच के दौरान गड़बड़ियों के कारण कई वोट खारिज कर दिए गए थे। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार दावेदार 6 से 7 लाख तक वोट जुटाने की रणनीति बना रहे हैं, ताकि अगर कुछ वोट निरस्त भी हों तो बढ़त बरकरार रहे।

इन पदों पर भी चुने जाएंगे कैंडिडेट

चुनाव में 18 से 35 वर्ष तक के युवा ही भाग ले सकेंगे। मतदान के बाद शीर्ष तीन उम्मीदवारों को दिल्ली में इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, जहां से एक प्रदेश अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष चुने जाएंगे। इसके अलावा संगठन में 400 ब्लॉक अध्यक्ष, 200 विधानसभा अध्यक्ष और 50 जिलाध्यक्ष भी चुने जाएंगे, जिनमें से 6 जिलाध्यक्ष पद अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रखे गए हैं।

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