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प्रदीप मिश्रा ने कथा में देवकीनंदन ठाकुर को ‘सनातन की ऊर्जा’ कहा, सनातन प्रीमियर लीग विजेता टीम को ट्राफी भी दी

Jaipur News: जयपुर में शिवमहापुराण कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा ने शिव भक्ति को जन्म-मरण से मुक्ति का मार्ग बताया, साथ ही ऊंचे पद पर आलोचना सहने का संदेश दिया।

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जयपुर

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Himesh Rana

Mar 25, 2026

फोटो- कथावाचक प्रदीप मिश्रा

Jaipur News: जयपुर के मानसरोवर वीटी रोड मेला ग्राउंड में चल रही शिवमहापुराण कथा के छठे दिन कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन हमें बार-बार मिलता है, लेकिन जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति केवल शिव भक्ति से ही संभव है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं, बल्कि माता-पिता, मित्र या रिश्तेदार के रूप में भी हमारे जीवन में आ सकते हैं, लेकिन हम उन्हें पहचान नहीं पाते।

उन्होंने रुद्राक्ष का महत्व बताते हुए कहा कि यह केवल एक माला नहीं, बल्कि स्वयं शिव का प्रतीक है। मिश्रा ने कहा कि जो लोग इस अवसर को नहीं समझते, उन्हें बाद में पछताना पड़ता है।

कथा में संतों का संगम और विशेष आयोजन

कथा के दौरान भक्तों के पत्र पढ़े गए और उन पर भगवान शिव की कृपा के प्रसंग सुनाए गए। इस अवसर पर प्रसिद्ध संत देवकीनंदन ठाकुर भी कथा स्थल पर पहुंचे, जहां दो संतों का मिलन हुआ। मिश्रा ने उन्हें सनातन की ऊर्जा बताते हुए समाज में धर्म के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस दौरान “सनातन प्रीमियर लीग” का भी उल्लेख किया गया और विजेता टीम राजस्थान को ट्रॉफी प्रदान की गई। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पंडाल छोटा पड़ गया और रातोंरात उसे चार गुना बढ़ाया गया।

ऊंचे पद पर आलोचना सहने का संदेश

प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में कहा कि जो व्यक्ति जितनी ऊंचाई पर पहुंचता है, उसे उतनी ही आलोचना, ताने और अपशब्द सुनने पड़ते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति जैसे बड़े पदों पर बैठे लोगों को अधिक धैर्य और गंभीरता रखनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर भी महादेव हैं, इसलिए वे गंभीर रहते हैं और सब कुछ सहते हैं। इंसान को भी जब ऊंचे पद पर पहुंचे तो आलोचना को सहन करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

भारी भीड़, आखिरी दिन बदला कथा का समय

कथा में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति ने व्यवस्थाएं बढ़ाई हैं। कई श्रद्धालु धूप में और सड़क किनारे बैठकर कथा सुन रहे हैं। मिश्रा ने प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्तों की सुविधा के लिए पंडाल का विस्तार किया गया। कथा के अंतिम दिन गुरुवार को समय में बदलाव किया गया है। कल कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक होगी, जबकि टीवी प्रसारण का समय दोपहर 2 से 5 बजे तक ही रहेगा।

इस धार्मिक आयोजन ने जयपुर में आध्यात्मिक माहौल बना दिया है, जहां हजारों श्रद्धालु शिव भक्ति में लीन होकर कथा का आनंद ले रहे हैं।

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