
जैसलमेर. विलुप्ति के कगार से संरक्षण-संवद्र्धन के अनेक उपायों से जैसलमेर जिले में संरक्षित किए जा रहे राजस्थान के राजकीय पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण की दिशा में जैसलमेर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। पोकरण क्षेत्र के रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र में तैयार किए गए अत्याधुनिक रिवाइल्डिंग स्ट्रक्चर (टनल) में पहली बार तीन गोडावण चूजों का सफल स्थानांतरण किया गया है। यह कदम गोडावण के संरक्षण और भविष्य में उसकी जंगली आबादी बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। करीब दो वर्षों में तैयार इस टनल निर्माण राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) ने लगभग 9.25 करोड़ की लागत से कराया है। इस टनल का आकार 160 गुणा 64 गुणा 14 मीटर है और यहां आर -9 , आर-़10 व आर-11 नामक चूजों को रखा गया है। यह विशेष संरचना गोडावण संरक्षण कार्यक्रम का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्रों में जन्मे चूजों को प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप तैयार करना है, ताकि उन्हें खुले वन क्षेत्र में छोड़े जाने के बाद जीवित रहने में कठिनाई न हो।
- वन विभाग के अनुसार 24 जुलाई को रामदेवरा स्थित गोडावण प्रजनन केन्द्र से लगभग एक माह आयु के तीन चूजों को सफलतापूर्वक इस रिवाइल्डिंग टनल में स्थानांतरित किया गया। यहां इन्हें लगभग चार माह तक रखा जाएगा। इस दौरान विशेषज्ञों और वन विभाग की टीम इनके स्वास्थ्य, व्यवहार और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता पर लगातार निगरानी रखेगी।
- टनल में चूजों को मरुस्थलीय प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है। यहां उन्हें स्थानीय वनस्पति, प्राकृतिक मौसम, कीट-पतंगों और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों से परिचित कराया जाएगा। इससे वे भोजन खोजने, वातावरण के अनुरूप स्वयं को ढालने तथा संभावित खतरों से बचाव जैसे प्राकृतिक व्यवहार सीख सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रशिक्षण भविष्य में प्राकृतिक आवास में उनके सफल जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
- निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद, जब चूजों में प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से जीवित रहने की पर्याप्त क्षमता विकसित हो जाएगी, तब उन्हें चरणबद्ध तरीके से डेजर्ट नेशनल पार्क के प्राकृतिक आवास में मुक्त किया जाएगा। इससे भारत में गोडावण के रीवाइल्डिंग (पुनस्र्थापन) कार्यक्रम को नई गति मिलेगी और भविष्य में इस अत्यंत संकटग्रस्त पक्षी की जंगली आबादी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गोडावण विश्व के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल है और इसकी संख्या लगातार घटती रही है। ऐसे में संरक्षण, वैज्ञानिक प्रजनन और अब रिवाइल्डिंग की यह प्रक्रिया इस दुर्लभ पक्षी के अस्तित्व को बचाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
रामदेवरा में तैयार टनल में तीन गोडावण चूजों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया है। आगामी महीनों में इनकी सतत निगरानी की जाएगी और पूरी तरह सक्षम होने पर इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। यह पहल गोडावण संरक्षण कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
- अशोक सिंह, उप वन संरक्षक (वन्यजीव) जैसलमेर