जैसलमेर

राजस्थान के जैसलमेर में 20 साल बाद दिखा दुनिया का दुर्लभ पक्षी, भारत-पाक सीमा के पास देखा गया सिंध वुडपेकर

जैसलमेर में दुर्लभ सिंध वुडपेकर दिखाई दिया। आवास घटने और पर्यावरणीय चुनौतियों से यह पक्षी बहुत दुर्लभ हो गया है और वन्यजीव प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है।
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Jan 19, 2026
Sindh Woodpecker
सिंध वुडपेकर पक्षी फोटो-पत्रिका

जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर में दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल सिंध वुडपेकर (Dendrocopos assimilis) को मुरार धनाना क्षेत्र में देखा गया है। यह इलाका भारत-पाकिस्तान सीमा के पास है। करीब 20 साल बाद इस प्रजाति का फिर से दिखना वन्यजीव विशेषज्ञों और पक्षी प्रेमियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस खास मौजूदगी ने न केवल देश, बल्कि विदेशों के बर्डवॉचर्स का भी ध्यान इस इलाके की ओर खींचा है।

सिंध वुडपेकर काले-सफेद रंग के सुंदर पंखों और लाल मुकुट वाला छोटा पक्षी है। यह आमतौर पर राजस्थान और पाकिस्तान के सूखे जंगलों और झाड़ी वाले इलाकों में रहता है। करीब 20 साल बाद यह पक्षी लगभग एक महीने पहले फिर दिखा था। अब यह यहां नियमित रूप से दिख रहा है। बीएसएफ (BSF) राजस्थान फ्रंटियर के इंस्पेक्टर जनरल एमएल गर्ग ने इस दुर्लभ पक्षी को देखने की पुष्टि की है।

दुर्लभ है सिंध वुडपेकर पक्षी

आवास कम होने और पर्यावरण की समस्याओं से सिंध वुडपेकर की संख्या घट गई है। पक्षी प्रेमी राधेश्याम पेमानी ने कहा कि पर्यावरण की बढ़ती चुनौतियों से यह पक्षी बहुत दुर्लभ हो गया है, इसलिए इसे देखना बहुत खास है। वहीं आईजी (IG) गर्ग ने कहा, यह जगह भारत-पाकिस्तान सीमा के बहुत करीब है, इसलिए यहां आने वाले लोगों को बीएसएफ से पहले अनुमति लेनी पड़ती है। यह सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है, ताकि आगंतुक और इलाका दोनों सुरक्षित रहें।

दुर्लभ पक्षी से बढ़ेगा पर्यटन

पक्षी विशेषज्ञ पर्थ जगानी ने कहा कि यह दुर्लभ दर्शन जैसलमेर में पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है और इलाके को वन्यजीव प्रेमियों का हॉटस्पॉट बना सकता है। गाइडेड बर्डवॉचिंग टूर अब काफी लोकप्रिय हो रहे हैं, जहां लोग खास तौर पर सिंध वुडपेकर को उसके प्राकृतिक घर में देखने आ रहे हैं। वरिष्ठ वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सुमित डूकिया ने बताया कि पर्यटन की यह बढ़ोतरी इलाके की जैव विविधता को दिखाती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मदद पहुंचाती है। होटल, लोकल गाइड और सेवाएं देने वालों को ज्यादा काम मिल रहा है। इससे पता चलता है कि सिंध वुडपेकर का दिखना संरक्षण और इको-टूरिज्म दोनों को फायदा पहुंचा रहा है।

वन्यजीवों में संरक्षण जरूरी

पक्षी प्रेमी दिवेश कुमार सैनी ने बताया कि सिंध वुडपेकर का दिखना यह याद दिलाता है कि भारत के सबसे दूर-दराज इलाकों में भी कितनी समृद्ध जैव विविधता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसी दुर्लभ प्रजातियों को बचाने के लिए लगातार प्रयास करने चाहिए। खबर फैलते ही उत्साही लोग साम धनाना और मुरार इलाकों में पहुंचने लगे हैं। वे इस मुश्किल से दिखने वाले पक्षी को देखना और उसके व्यवहार को रिकॉर्ड करना चाहते हैं।

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Updated on:
19 Jan 2026 07:23 pm
Published on:
19 Jan 2026 07:22 pm