
जैसलमेर। शहर कोतवाली थाने के बाहर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का पिछले छह दिनों से जारी धरना और अनिश्चितकालीन अनशन शनिवार देर रात समाप्त हो गया। जोधपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की ओर से जारी प्रशासनिक तबादला आदेश में शहर कोतवाल सुरजाराम का जैसलमेर से पाली जिले में स्थानांतरण किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई। तबादले की सूचना मिलते ही धरना स्थल पर मौजूद छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। भाजपा नेताओं की मौजूदगी में अनशन पर बैठे छात्र नेताओं को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया।
गौरतलब है कि अभाविप कार्यकर्ता शहर कोतवाल सुरजाराम और हेड कांस्टेबल दीपेंद्र सिंह पर छात्र कार्यकर्ताओं से कथित दुव्र्यवहार का आरोप लगाते हुए उनके निलम्बन की मांग को लेकर पिछले छह दिनों से शहर कोतवाली के बाहर धरने पर बैठे थे। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से आंदोलन तेज हो गया और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्रङ्क्षसह करड़ा गत मंगलवार व करणपाल सिंह बुधवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे थे।
शनिवार देर रात आईजी की ओर से जारी प्रशासनिक तबादला सूची में शहर कोतवाल सुरजाराम का नाम शामिल होने की सूचना मिलते ही आंदोलन स्थल का माहौल बदल गया। अभाविप कार्यकर्ताओं ने इसे अपने संघर्ष और एकजुटता की जीत बताया। इसके बाद भाजपा नेता सवाईसिंह गोगली, नगर मंडल अध्यक्ष अरुण पुरोहित, सुनीता भाटी, छुगसिंह सोढ़ा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता धरना स्थल पहुंचे। सभी की मौजूदगी में अनशनकारियों को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया गया। जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी, भाजपा जिलाध्यक्ष दलपत हिंगड़ा और प्रदेश मंत्री आईदानसिंह भाटी वीडियो कॉल के जरिए आंदोलनकारियों के साथ जुड़े। आंदोलन समाप्त होने के साथ ही शहर कोतवाली के बाहर सामान्य स्थिति बहाल हो गई। एक तरफ पुलिस अधिकारियों ने तबादला आदेश को प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है तो दूसरी ओर परिषद ने कहा कि यह छात्रों के शांतिपूर्ण संघर्ष और संगठन की एकजुटता का परिणाम है।
गौरतलब है कि गत दिनों कारगिल विजय दिवस पर तिरंगा रैली निकाले जाने की अनुमति लेने जाने के दौरान अभाविप ने शहर कोतवाल व हेड कांस्टेबल पर दुव्र्यवहार करने का आरोप लगाया था। उसके बाद धरना व अनशन शुरू किया गया। जबकि पुलिस प्रशासन की तरफ से प्रारंभिक जांच का हवाला देते हुए कहा गया कि परिषद के कार्यकर्ता करीब 11 मिनट ही थाने में रहे और उनके साथ किसी तरह का दुव्र्यवहार नहीं किया गया।