- दोपहर को मंदिर परिसर में ही रही भीड़- मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं का रेला जस का तस
रामदेवरा. लोकदेवता बाबा रामदेव के 634वें अन्तरप्रान्तीय मेले के ध्वजारोहण के तीसरे ही दिन श्रद्धालुओं की कतारें आधी से भी कम रह गई। भाद्रपद द्वितीया के मौके पर बाबा की समाधि के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ जहां तीन से चार किलोमीटर तक पहुंच गई थी और एक अनुमान के तहत बाबा की दूज को करीब चार से पांच लाख श्रद्धालुओं ने समाधि के दर्शन किए। जबकि गुरुवार को भक्तों की यह कतार आधा किलोमीटर भी नहीं पहुंची। हालांकि मेले में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ देखने को मिली। मेले के तीसरे दिन शुक्रवार को यहां आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। दो दिन पूर्व तक बेरिकेडिंग से कई किलोमीटर बाहर विरमदेवरा जाने वाली सडक़ तक श्रद्धालुओं की कतार लगी, लेकिन चतुर्थी को भक्तों की भीड़ आधे से भी कम रही। हालांकि सुबह-सुबह पेड़ीवाल धर्मशाला तक श्रद्धालुओं की लाइनें लगी, लेकिन दस-ग्यारह बजे तक भक्तों की कतार सिमटती गई और दोपहर तक तो मुख्य तौर पर भीड़ का नजारा समाधि स्थल से मंदिर परिसर के मुख्य द्वार तक आकर ही सिमट गया। हालांकि श्रद्धालुओं की आवक जारी है, लेकिन भीड़ कम हो जाने से अब भक्तों को आसानी से दर्शन हो रहे है।
मेले की रौनक में नहीं है कमी
मेले के दौरान भले ही चतुर्थी के दिन श्रद्धालुओं की कतार कम लगी, लेकिन पूरे रामदेवरा में श्रद्धालुओं की रेलमपेल बनी हुई है। चाहे बाजार हो या रामसरोवर तालाब, चहुंओर बाबा के जयकारे लगाते व भजन करते श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा हुआ है। रामसरोवर के घाट व तालाब की पाल पर डेरा डालकर बैठे श्रद्धालु भजन कीर्तन करते देखे जा सकते है। यहां आने वाले श्रद्धालु एक दिन पूर्व समाधि के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु रामदेवरा में जागरण जम्मा लगवाने के लिए रुक जाते है। ऐसे में मंदिर में दर्शनों के बाद मेले में चहल पहल बनी हुई है।
रामसरोवर पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध
पवित्र रामसरोवर में इन्दिरा गांधी नहर के पानी की आवक से तालाब पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु यहां डुबकी लगाकर श्रद्धा का इजहार कर रहे है। दूसरी तरफ प्रशासन की ओर से यहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आरएसी की टीमें तैनात की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय वारदात होने पर उस पर तत्काल काबू किया जा सके। इसी प्रकार मथुरा से आए नाविक भी प्रशासन को सहयोग कर रहे है। मथुरा से आए पप्पु केवट ने बताया कि नाविकों की ओर से यहां सरोवर पर नहा रहे किसी भी व्यक्ति के डूबने पर तत्काल उसे बाहर निकालने में सहयोग किया जाता है।