
जैसलमेर. सरहदी जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में मूक पशुओं और वन्यजीवों को पानी की प्यास मौत के द्वार ले जा रही है। भीषण गर्मी के कारण जीएलआर सूख गए है, वहीं तालाबों में पैंदे में पड़ा पानी दलदल बन गया है। जिससे यहां आने वाले प्राणियों की प्यास बुझने से पहले इनके जीवन की लौ बुझ रही है। तालाबों के किनारे बना दलदल पानी पर मौत बनकर पहरा दे रहा है। जो भी पशु यहां पहुंच रहा है, वह मौत की आगोश में समा रहा है, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं। हालात यह है कि रेगिस्तानी गांवों का पानी मौत के पहरे में है, जिसे भी पीना है उसे मौत के रास्ते ही पानी तक पहुंचना पड़ रहा है, लेकिन वापिस लौट कर आने की उम्मीद नहीं है। अब तक जिले भर में दलदल में फंसकर डेढ़ दर्जन से अधिक पशु अकाल मौत मर चुके है, फिर भी जिम्मेदार आंखे मूंदे है।
दलदल में फंसकर जान गंवा रहे है पशु
गांव में स्थित जलदाय विभाग की जीएलआर व पशुखेलियां खाली होने के कारण पशु गांव की नाडी में पानी पीने के लिए जाते है, लेकिन यहां पानी कम होने व जमीन दलदली होने के कारण पशु उसमें फंसकर अपनी जान गंवा रहे है। गत एक सप्ताह में करीब तीन-चार गाय व बछड़ों की दलदल में फंस जाने से मौत हो चुकी है। कुछ पशुओं को जानकारी होने पर ग्रामीणों की ओर से दलदल से निकाला भी गया है। ग्रामीणों ने बताया कि न तो पाइपलाइन से जीएलआर में जलापूर्ति हो रही है, न ही टैंकरों से पशुखेलियों में पानी डाला जा रहा है। ऐसे में भीषण गर्मी के कारण ग्रामीणों व पशुओं के हालात बिगड़ रहे है।
जलापूर्ति को झटका, ग्रामीण परेशान, मवेशी हो रहे काल के ग्रास
पोकरण. क्षेत्र के मांगोलाई गांव में गत दो-तीन माह से जलापूर्ति बंद होने के कारण एक तरफ ग्रामीणों को पेयजल संकट से रूबरू होना पड़ रहा है। दूसरी तरफ पशुखेलियां खाली होने व गांव की नाडी में पानी नहीं होने के कारण मवेशी के हालात खराब हो रहे है।गौरतलब है कि मांगोलाई गांव में अलग-अलग ढाणियों में तीन-चार जीएलआर बने हुए है। जिन्हें कलाऊ-धूड़सर पेयजल योजना से जलापूर्ति की जाती है। गत दो-तीन माह से जलापूर्ति बंद होने के कारण सभी जीएलआर व पशुखेलियां खाली पड़ी है। ग्रामीणों को धूड़सर हेडवक्र्स, लवां अथवा पोकरण से 8 00 से एक हजार रुपए देकर ट्रैक्टर टंकियों से पानी खरीदकर मंगवाना पड़ रहा है। जबकि पशुओं के लिए गांव में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है।