
जैसलमेर. कारगिल विजय दिवस पर तिरंगा यात्रा निकालने की अनुमति लेने गए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के कार्यकर्ताओं के साथ शहर कोतवाल सुरजाराम और एक हेड कांस्टेबल दीपेन्द्रसिंह की ओर से कथित रूप से बदसलूकी किए जाने के विरोध में शहर कोतवाली थाने के बाहर अभाविप कार्यकर्ताओं का धरना-प्रदर्शन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान धरना स्थल पर जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी और पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। दोनों विधायकों ने कार्यकर्ताओं का पक्ष सुना और उचित कार्रवाई करवाने का भरोसा दिलाया। भाजपा के दोनों विधायकों ने बुधवार को ही इस मामले में जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे से भी मुलाकात की। बताया जाता है कि पुलिस अधीक्षक ने उन्हें प्रकरण के विषय में प्राप्त तथ्यों से अवगत करवाया। एक तरफ अभाविप कार्यकर्ता कोतवाली के सामने तीन दिनों से धरना देकर बैठे हैं और दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक शिवहरे ने कहा कि उन्हें इस मामले में अभी तक परिषद की तरफ से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। अगर वे कोई शिकायत पेश करते हैं तो मामले की उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाएगी।
इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग को लेकर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्रसिंह करड़ा मंगलवार दोपहर से और अभाविप के विभाग संयोजक कर्णपालसिंह कोटड़ा ने बुधवार सुबह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। वरिष्ठ कार्यकर्ता कृष्णपाल सिंह सेऊआ ने बताया कि परिषद के प्रांतस्तरीय पदाधिकारियों का एक दल गुरुवार को जैसलमेर आ रहा है। उन्होंने बताया कि अगर मांगें नहीं मानी गई तो अभाविप की ओर से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। जानकारी के अनुसार धरनास्थल पर विधायक के सामने अभाविप कार्यकर्ताओं ने कोतवाली में तैनात दो पुलिसकर्मियों की ओर से उनके साथ किए जा रहे आपत्तिजनक व्यवहार किए जाने की शिकायत की। जिसेलेकर विधायक ने पुलिस प्रशासन से बात की।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अभाविप और पुलिस के बीच विवाद में पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे ने गत 26 जुलाई को हुए घटनाक्रम से जुड़े तथ्य सामने रखे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता उस दिन सिर्फ 11 मिनट तक कोतवाली थाने में थे। उसके बाद दोपहर 3.21 बजे रैली की अनुमति जारी कर दी गई और अनुमति मिलने के बाद तिरंगा यात्रा शांतिपूर्वक संपन्न भी हो गई। शिवहरे ने बताया कि अभी तक इस संबंध में उन्हें कोई लिखित शिकायत या ज्ञापन नहीं मिला है। धरना दे रहे कार्यकर्ताओं से समझाइश और वार्ता जारी है।