जैसलमेर

Jaisalmer: खदानों से उद्योग तक सफर अधूरा, जैसलमेर अब भी स्टोन हब बनने को तरस रहा

जैसलमेर. सुनहरे पत्थर के विशाल भंडार और ओडीओपी की पहचान के बावजूद जैसलमेर आज भी स्टोन इंडस्ट्रियल हब बनने की राह देख रहा है। जिले में खनन तो बड़े पैमाने पर हो रहा है, लेकिन वैल्यू एडिशन उद्योगों के अभाव में अधिकांश पत्थर कच्चे या सीमित प्रसंस्करण के बाद बाहर भेज दिया जाता है। नतीजतन रोजगार, निवेश और उद्योग से मिलने वाला बड़ा आर्थिक लाभ दूसरे शहरों के हिस्से में जा रहा है।
2 min read
Jul 31, 2026
jaisalmer stone news photo
नए औद्योगिक क्षेत्र, प्रोसेसिंग क्लस्टर और निर्यात सुविधाएं मिलने पर बदल सकती है जैसलमेर के स्टोन उद्योग की तस्वीर।

जैसलमेर. धरती के नीचे छिपा सुनहरा पत्थर जैसलमेर की सबसे बड़ी प्राकृतिक संपदाओं में गिना जाता है। जिले की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान है, हजारों लोगों को रोजगार मिलता है और राज्य सरकार ने इसे एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) के रूप में भी मान्यता दी है। इसके बावजूद एक बड़ा सवाल आज भी कायम है—जब इतना बड़ा खनिज संसाधन मौजूद है तो जैसलमेर आज तक स्टोन इंडस्ट्रियल हब क्यों नहीं बन पाया? विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में खनन तो हो रहा है, लेकिन वैल्यू एडिशन की पूरी श्रृंखला विकसित नहीं हो सकी। यही कारण है कि यहां से निकलने वाला पत्थर बड़ी मात्रा में कच्चे या सीमित प्रसंस्करण के बाद बाहर चला जाता है और सबसे अधिक आर्थिक लाभ दूसरे शहरों को मिलता है।

सिर्फ खदानें नहीं, उद्योग भी चाहिए

जैसलमेर में वर्तमान में मुख्य रीको, किशनघाट और शिल्पग्राम सहित तीन औद्योगिक क्षेत्र हैं, लेकिन उद्योग जगत का कहना है कि इनकी क्षमता अब लगभग भर चुकी है। नए निवेशकों को पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं हो रही। परिणामस्वरूप कई उद्यमी अन्य जिलों का रुख कर रहे हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का सुझाव है कि बाड़मेर मार्ग या किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट नया स्टोन इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किया जाए। इससे केवल पत्थर उद्योग ही नहीं, बल्कि मशीन निर्माण, कटिंग, पॉलिशिंग, पैकेजिंग, डिजाइनिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े अनेक उद्योग भी विकसित हो सकते हैं।

विकास की अधूरी कड़ी

- सीमित कटिंग और पॉलिशिंग इकाइयां

- तैयार उत्पादों की कम ब्रांडिंग

- बाय-प्रोडक्ट उद्योगों का अभाव

- मशीन निर्माण इकाइयों की कमी

- डिजाइन और स्टोन क्राफ्ट उद्योग विकसित नहीं हो सके

- निर्यात केंद्र और लॉजिस्टिक हब का अभाव

रिफाइनरी और हाईवे बन सकते हैं अवसर

बाड़मेर में रिफाइनरी परियोजना के पूर्ण होने के बाद पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। यदि जैसलमेर समय रहते नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करता है तो पत्थर आधारित उद्योगों के साथ-साथ मशीनरी, निर्माण सामग्री, स्टोन केमिकल्स और अन्य सहायक उद्योग भी यहां स्थापित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसलमेर का भौगोलिक स्थान गुजरात, उत्तर भारत और पश्चिमी भारत के बाजारों को जोड़ने की क्षमता रखता है। जरूरत केवल दीर्घकालिक औद्योगिक योजना की है।

सिर्फ पत्थर नहीं, पूरा इकोसिस्टम बनाना जरूरी

- नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना

- स्टोन प्रोसेसिंग क्लस्टर स्थापित करना

- कारीगर प्रशिक्षण एवं डिजाइन सेंटर

- आधुनिक मशीनरी पर अनुदान

- कॉमन टेस्टिंग लैब और डिजाइन स्टूडियो

- निर्यात सुविधा केंद्र और ड्राई पोर्ट जैसी व्यवस्था

एक्सपर्ट व्यू: भूमि, आधारभूत सुविधाएं और नीति—तीनों ही जरूरी

यदि नए औद्योगिक क्षेत्र के साथ छोटे और मध्यम उद्योगों को भूमि उपलब्ध कराई जाए तो जैसलमेर में निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है। केवल पत्थर बेचने के बजाय तैयार उत्पाद, डिजाइन स्टोन और आर्किटेक्चरल एलिमेंट्स के उत्पादन पर जोर दिया जाए तो निर्यात कई गुना बढ़ सकता है। उद्योग के विस्तार के लिए भूमि, आधारभूत सुविधाएं और नीति—तीनों का एक साथ विकास आवश्यक है।

- संजय बिंझानी, पत्थर व्यवसाय विशेषज्ञ

Updated on:
31 Jul 2026 09:02 pm
Published on:
31 Jul 2026 09:02 pm