
रेगिस्तान की गोद में बसा जैसलमेर इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। दिन का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है, लेकिन जैसे ही सूर्यास्त होता है, शहर की तस्वीर बदल जाती है। बाजारों और सड़कों के साथ अब पार्क भी लोगों की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।
शहर के प्रमुख पार्कों, उद्यानों और सार्वजनिक हरित क्षेत्रों में शाम के समय बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। यह बदलाव केवल सैर-सपाटे तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, सामाजिक जुड़ाव और डिजिटल जीवनशैली के बीच संतुलन का नया मॉडल बनकर उभर रहा है। कुछ वर्ष पहले तक पार्कों का उपयोग मुख्य रूप से मॉर्निंग वॉक या बच्चों के खेलने तक सीमित माना जाता था। अब ओपन जिम, वॉकिंग ट्रैक, बैठने की आधुनिक सुविधाओं और हरित वातावरण ने इन्हें शहर की इवनिंग लाइफलाइन में बदल दिया है। शाम छह बजे के बाद पार्कों में युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।
शहर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ ओपन जिम का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है। महंगे जिम की सदस्यता के बजाय बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक पार्कों में उपलब्ध उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। वॉकिंग ट्रैक पर नियमित दौड़ने और चलने वालों की संख्या में भी वृद्धि देखी जा रही है।
-शाम के समय पार्कों में सर्वाधिक भीड़
-ओपन जिम उपकरणों का बढ़ता उपयोग
-परिवार आधारित आउटडोर गतिविधियां बढ़ीं
-बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने की कोशिश
-वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक समूह सक्रिय
-मोबाइल, वीडियो गेम और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच पार्क बच्चों के लिए डिजिटल डिटॉक्स स्पेस की भूमिका निभा रहे हैं। झूले, स्लाइड, खुले मैदान और समूह खेल बच्चों को स्क्रीन से बाहर निकाल रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को पार्कों में समय बिताने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके।
पार्क अब केवल मनोरंजन स्थल नहीं रहे। यहां प्रतिदिन मिलने वाले लोगों के बीच सामाजिक संबंध भी मजबूत हो रहे हैं। महिलाओं के समूह, वरिष्ठ नागरिक मंच, फिटनेस ग्रुप और युवा मंडलियां स्वतः विकसित हो रही हैं। कई लोग मानते हैं कि पड़ोसियों और परिचितों से नियमित मुलाकात का सबसे आसान माध्यम अब पार्क बन गए हैं।
चिकित्सकों के अनुसार प्रतिदिन 30 से 45 मिनट तक खुली हवा और हरित वातावरण में समय बिताने से तनाव कम होता है, हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है और मानसिक संतुलन मजबूत होता है। नियमित शारीरिक गतिविधियां गर्मी के मौसम में भी शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करती हैं।
दिनभर व्यापारिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के बाद शाम को पार्क में एक घंटा बिताना मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। यहां आने से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। ओपन जिम और वॉकिंग ट्रैक जैसी सुविधाओं ने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया है। पहले शाम का समय घर या बाजार तक सीमित रहता था, लेकिन अब पार्क सामाजिक और स्वास्थ्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
-संजय सोनी, व्यवसायी
महिलाओं के लिए पार्क एक सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं। शाम के समय यहां बड़ी संख्या में महिलाएं सैर करने, योग करने और आपसी संवाद के लिए पहुंचती हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि सामाजिक जुड़ाव भी बढ़ता है। बच्चों के खेलने की सुविधाएं होने से पूरा परिवार एक साथ समय बिता पाता है। यह बदलाव शहर की जीवनशैली में सकारात्मक असर छोड़ रहा है।
-रोहिणी चौधरी, गृहिणी
शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का सुकून कुछ वर्ष पहले तक वरिष्ठ नागरिकों के पास मिलने-जुलने के सीमित अवसर थे। अब पार्कों में प्रतिदिन नियमित बैठकें होती हैं। यहां स्वास्थ्य, समाज और समसामयिक विषयों पर चर्चा होती है। वॉकिंग ट्रैक और हरियाली के बीच समय बिताने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का लाभ मिलता है। पार्कों ने वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय और सामाजिक रूप से जुड़ा रहने का नया मंच दिया है।
-रमेशसिंह सोलंकी, वरिष्ठ नागरिक
स्कूल और पढ़ाई के बाद पार्क में सहेलियों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। यहां खेलकूद करने और खुली हवा में रहने का मौका मिलता है। मोबाइल पर लगातार समय बिताने की बजाय पार्क में आकर ज्यादा खुशी मिलती है। झूले, खेल क्षेत्र और खुला वातावरण बच्चों को आकर्षित करता है। शाम के समय यहां काफी बच्चे आते हैं।
- खुशी चौहान, छात्रा