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Jaisalmer: गोवंश के शवों की निस्तारण व्यवस्था सवालों के घेरे में…बार-बार सामने आ रहा रोष

जैसलमेर. सीमावर्ती जिले में मृत गोवंश के शवों के अनुचित निस्तारण के लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसलमेर, रामदेवरा और पोकरण में ऐसी घटनाओं से जनाक्रोश की स्थिति बनी, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। वैज्ञानिक और सम्मानजनक निस्तारण व्यवस्था के अभाव में संवेदनशील माहौल बनने की आशंका भी बढ़ रही है।
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जैसलमेर। गोवंश सहित अन्य पशुधन के शवों के वैज्ञानिक निस्तारण की दरकार।

जैसलमेर. सीमावर्ती जैसलमेर जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी कहे जाने वाले गोवंश के शवों के अनुचित निस्तारण के चलते बीते दिनों के दौरान जैसलमेर सहित रामदेवरा और पोकरण में जनाक्रोश भडकऩे जैसी स्थितियां सामने आने के बावजूद जिम्मेदार गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। गोवंश के शवों की बेकद्री के लगातार सामने आए मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसलमेर शहर, पोकरण और रामदेवरा क्षेत्र में एक के बाद एक सामने आई घटनाओं में कहीं गोवंश के शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिले तो कहीं खुले स्थानों पर उन्हें फेंका गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। इन घटनाओं की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद माहौल संवेदनशील हो गया और प्रशासन व पुलिस को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि कुछ समय पहले जैसलमेर शहर से बमुश्किल 10 किमी दूर बड़ाबाग क्षेत्र में नगरपरिषद के डम्पिंग यार्ड में सैकड़ों गोवंश के शव खुले में पड़े होने की जानकारी मिलने का मामला तूल पकड़ गया था। इसके बाद रामदेवरा, मोहनगढ़ और पोकरण में भी गोवंश के शवों के अनुचित तरीके से पड़े होने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने रोष व्यक्त किया। जैसलमेर में तो बीते दिनों पशु चिकित्सालय परिसर में गोवंश के शव को खुले में फेंके जाने की घटना सामने आई। इन घटनाओं से यह साफ हो गया कि मृत गोवंश सहित अन्य पशुओं के वैज्ञानिक एवं सम्मानजनक निस्तारण की व्यवस्था प्रभावी नहीं है।

बार-बार बन रहे अप्रिय हालात

स्थानीय लोगों का कहना है कि मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था समयबद्ध नहीं होने से ऐसी स्थितियां बार-बार बनती हैं। कई बार सूचना देने के बावजूद संबंधित एजेंसियां देर से पहुंचती हैं, जिससे शव का कोई हिस्सा खुले में पड़ा रहता है। इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि दुर्गंध, संक्रमण और स्वच्छंद पशुओं की समस्या भी बढ़ती है। जानकारों का मानना है कि सीमावर्ती और धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकती हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हो तो छोटी घटनाएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। ऐसे मामलों में नगर निकाय, पशुपालन विभाग, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

सख्ती से प्रोटोकॉल की पालना

- मृत गोवंश के निस्तारण के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक निकाय क्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया दल, पर्याप्त वाहन और चिन्हित निस्तारण स्थल उपलब्ध होना जरूरी है। साथ ही सूचना मिलने के बाद तय समय सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करनी होगी।

संवेदनशील मसला

यह केवल सफाई व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि जनभावनाओं, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा भी है। समयबद्ध कार्रवाई और बेहतर समन्वय से ही इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

- लालूसिंह सोढ़ा, सामाजिक कार्यकर्ता

मृत गोवंश के निस्तारण की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए, जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय हो और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाए। संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई, पारदर्शिता और नियमित निगरानी से ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। इसी प्रकार सभी घटनाओं की समुचित जांच करने की भी मांग सरकार से की गई है।

-हाकमदान झीबा, अध्यक्ष, श्रीकरणी कृपा गोरक्षक सेवा समिति