जैसलमेर

ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत ने दिखाई ताकत: ‘एंटी-ड्रोन’ क्षमताओं का किया परीक्षण

ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत ने अपनी एयर डिफेंस ताकत दिखाई। राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में सेना ने हाई-इंटेंसिटी अभ्यास कर एंटी-एयरक्राफ्ट L-70 गन से ड्रोन टारगेट्स को मार गिराया। रडार और हाई-टेक सिस्टम से हवाई खतरों से निपटने की क्षमता परखी गई।

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Mar 10, 2026
India tests air defence at Pokhran shoots down drone targets with L-70 guns amid rising Iran-Israel War
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत का 'शक्ति प्रदर्शन' (फोटो सोशल मीडिया)

जैसलमेर: पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय सेना ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया है। राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान की एयर डिफेंस ब्रिगेड ने एक 'हाई-इंटेंसिटी' सैन्य अभ्यास कर अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाया।

इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य भविष्य के युद्धों में सबसे बड़े खतरे के रूप में उभर रहे ड्रोन और स्वार्म हमलों को नाकाम करना था। आज के दौर में युद्ध केवल टैंकों और पैदल सेना तक सीमित नहीं रह गया है। यूक्रेन-रूस और मध्य-पूर्व के संघर्षों ने यह सिद्ध कर दिया है कि कम लागत वाले 'कामिकेज़' ड्रोन और छोटे मानवरहित विमान बड़े से बड़े सैन्य ठिकानों के लिए चुनौती बन सकते हैं। इसी खतरे को भांपते हुए भारतीय सेना ने पोकरण की तपती रेत में 'एंटी-ड्रोन' क्षमताओं का कड़ा परीक्षण किया।

अभ्यास के दौरान एक काल्पनिक परिदृश्य रचा गया, जिसमें दुश्मन के कई ड्रोन ने एक साथ भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय एयर डिफेंस यूनिट्स ने पलक झपकते ही सक्रियता दिखाई। सबसे पहले इन ड्रोन्स को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स के जरिए पंगु बनाया गया और फिर रडार-गाइडेड एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर दिया गया।

L-70 गन: आसमान की रक्षक और 'ड्रोन किलर'

इस पूरे युद्धाभ्यास का मुख्य आकर्षण अपग्रेड की गई L-70 विमानभेदी गन रही। मूल रूप से स्वीडन की बोफोर्स कंपनी द्वारा निर्मित और अब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा आधुनिक सेंसरों से लैस यह गन भारतीय वायु सुरक्षा की रीढ़ है।

L-70 की मारक क्षमता के प्रमुख बिंदु

  • यह गन प्रति मिनट 240 से 330 राउंड फायर करने की क्षमता रखती है, जिससे दुश्मन के विमान या ड्रोन के बचने की संभावना शून्य हो जाती है।
  • 3.5 से 4 किलोमीटर की प्रभावी दूरी तक यह किसी भी उड़ते लक्ष्य को भेद सकती है।
  • थर्मल इमेजर और लेजर रेंज फाइंडर जैसे उपकरणों की मदद से यह रात के घने अंधेरे में भी उतनी ही सटीक है जितनी दिन के उजाले में।
  • यह 'फ्लाई-कैचर' रडार से जुड़ी होती है, जो कई किलोमीटर दूर से ही छोटे से छोटे ड्रोन को ट्रैक कर कंप्यूटर कंसोल पर उसकी लोकेशन भेज देता है।

रडार और टेक्नोलॉजी का घातक मेल

सेना ने इस अभ्यास में दिखाया कि कैसे रडार, कंप्यूटर और गन सिस्टम एक 'इंटीग्रेटेड नेटवर्क' की तरह काम करते हैं। उन्नत रडार प्रणालियों ने एक साथ कई लक्ष्यों की पहचान की और कंट्रोल रूम में बैठे विशेषज्ञों को डेटा भेजा।

हाई-टेक कंप्यूटर एल्गोरिदम ने लक्ष्य की गति और दिशा का विश्लेषण किया, जिसके बाद ऑटोमेटेड कमांड के जरिए गनों ने लक्ष्य को इंटरसेप्ट किया। सेना के अधिकारियों के अनुसार, किसी भी हवाई खतरे को पहचानने से लेकर उसे नष्ट करने तक की प्रक्रिया महज कुछ सेकंडों में पूरी कर ली गई।

सामरिक संदेश और 'मिशन रेडी' रणनीति

पोकरण में मौजूद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं है, बल्कि भारत की 'मिशन रेडी' रणनीति का हिस्सा है। ईरान-इजरायल-अमेरिका विवाद के कारण पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत अपनी रक्षा तैयारियों को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

जैसलमेर के अग्रिम मोर्चों पर इस तरह की तैनाती और अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत के हवाई क्षेत्र में परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा। सेना अब ड्रोन तकनीक और स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम के एकीकरण पर जोर दे रही है, ताकि 'मेक इन इंडिया' के तहत देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

Updated on:
10 Mar 2026 04:03 pm
Published on:
10 Mar 2026 02:01 pm