जैसलमेर

जैसलमेर में ‘कूलिंग इकॉनमी बूम’ भीषण गर्मी ने बदला स्थानीय कारोबार का दृश्य

थार मरुस्थल में इस बार गर्मी केवल तापमान का रिकॉर्ड नहीं तोड़ रही, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की दिशा भी बदल रही है। बढ़ते तापमान के साथ कूलिंग इकॉनमी तेजी से उभर रही है, जिसमें एसी, कूलर, बर्फ, ठंडे पेय और किराये पर कूलिंग उपकरणों का बाजार अप्रत्याशित रूप से विस्तार कर रहा है।

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May 16, 2026
photo patrika

थार मरुस्थल में इस बार गर्मी केवल तापमान का रिकॉर्ड नहीं तोड़ रही, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की दिशा भी बदल रही है। बढ़ते तापमान के साथ कूलिंग इकॉनमी तेजी से उभर रही है, जिसमें एसी, कूलर, बर्फ, ठंडे पेय और किराये पर कूलिंग उपकरणों का बाजार अप्रत्याशित रूप से विस्तार कर रहा है।

मौसम विभाग और स्थानीय बाजार आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में जैसलमेर में अधिकतम तापमान लगातार 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। इस तापमान वृद्धि का सीधा असर उपभोक्ता व्यवहार पर पड़ा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस सीजन में कूलिंग उपकरणों की मांग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अब गर्मी केवल नुकसान का मौसम नहीं रही, बल्कि यह लाभ का बड़ा अवसर बन गई है। भीषण गर्मी ने उपभोक्ता व्यवहार को भी बदल दिया है।

पहले जहां एसी और कूलर विलासिता माने जाते थे, अब वे आवश्यक उपकरण बन चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग अस्थायी कूलिंग समाधान की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। जैसलमेर की यह कूलिंग इकॉनमी अब संकेत दे रही है कि रेगिस्तान में गर्मी केवल चुनौती नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का नया इंजन भी बन सकती है।

फैक्ट फाइल: बाजार में आए प्रमुख बदलाव

-एसी बिक्री में पिछले साल की तुलना में लगभग प्रतिशत की बढ़ोतरी

-कूलर की स्थानीय मांग में 40 प्रतिशत तक उछाल

-बर्फ फैक्ट्रियों में उत्पादन क्षमता 80 प्रतिशत से अधिक उपयोग

-ठंडे पेय और पानी पैकेजिंग बिक्री में 25-30 प्रतिशत वृद्धि

-इवेंट आधारित कूलिंग किराये सेवाओं में 50 प्रतिशत तक मांग वृद्धि

किराये मॉडल ने बदला छोटे कारोबार का ढांचा

जैसलमेर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में नया ट्रेंड तेजी से उभरा है—कूलिंग उपकरण किराये पर देना। कई युवा और छोटे व्यापारी अब कूलर, वाटर कूलर, आइस बॉक्स और जनरेटर आधारित अस्थायी कूलिंग सिस्टम किराये पर उपलब्ध करा रहे हैं। कम निवेश में व्यवसाय शुरू हो रहा है, वहीं सीजनल आय 20,000 से 60,000 रुपए मासिक तक पहुंच रही है। इसके अलावा शादी, पार्टी और धार्मिक आयोजनों में मांग बढ़ी है और सामाजिक और उपभोक्ता बदलाव देखने को मिल रहा है।

एक्सपर्ट व्यू:

आर्थिक विश्लेषक डॉ. राजेश चौधरी के अनुसार मरुस्थलीय क्षेत्रों में मौसम आधारित अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है। कूलिंग इकॉनमी इसका स्पष्ट उदाहरण है। आने वाले वर्षों में यह सेक्टर स्थानीय रोजगार और माइक्रो-उद्यमों के लिए मजबूत आधार बन सकता है। उनके अनुसार यदि यह ट्रेंड जारी रहा तो जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में केवल पर्यटन ही नहीं, बल्कि मौसमी सेवा उद्योग भी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा।

भविष्य की दिशा

-स्मार्ट कूलिंग टेक्नोलॉजी की मांग बढ़ेगी

-सोलर आधारित कूलिंग सिस्टम का विस्तार होगा

-ग्रामीण क्षेत्रों में किराये मॉडल और मजबूत होगा

-छोटे उद्यमों के लिए नए स्टार्टअप अवसर बनेंगे

Published on:
16 May 2026 08:55 pm
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