
जैसलमेर. रेगिस्तान में पर्यटन का बड़ा केंद्र खड़ा करना सिर्फ होटल और सडक़ें बनाने का मामला नहीं है। यहां प्रकृति की अपनी सीमाएं हैं और पर्यटक की अपेक्षाएं भी अलग हैं। देश के सबसे कम बारिश वाले क्षेत्रों में शुमार जैसलमेर ने इन दोनों के बीच एक ऐसा अनुभव विकसित किया है, जिसमें किला, हवेलियां, धोरे, ऊंट सफारी, कैंपिंग, लोक संस्कृति और खानपान एक साथ पर्यटन उत्पाद बनते हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग जैसलमेर को किले और हवेलियों के शहर के साथ थार मरुस्थल, सम और खुहड़ी के लहरदार धोरों, ऊंट सफारी व रेगिस्तानी कैंपिंग से जोड़ता है। यही जैसलमेर की अन्य क्षेत्रों का सीख भी है—स्थानीय भू-दृश्य को बदलने के बजाय उसी की विशिष्टता को पर्यटन अनुभव में बदलना। जैसलमेर के धोरों पर पर्यटन का आधार किसी कृत्रिम मनोरंजन ढांचे से ज्यादा प्राकृतिक परिदृश्य है। ऊंट सफारी, जीप सफारी, कैंपिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम पर्यटक को रेगिस्तान के साथ सीधे जोड़ते हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग सम और खुहड़ी में ऊंट सफारी व जैसलमेर के धोरों में कैंपिंग को प्रमुख पर्यटन गतिविधियों के रूप में दर्ज करता है। यह मॉडल शुष्क क्षेत्रों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पर्यटन की पहचान बनाने के लिए हर बार प्राकृतिक भू-दृश्य को बदलना जरूरी नहीं होता।
साल 1990 के दशक से ऊंट सफारी, अब पर्यटन अनुभव का बड़ा हिस्सा है। पर्यटन क्षेत्र इसे रेगिस्तानी गांवों, धोरों, प्राचीन हवेलियों, मंदिरों, स्थानीय खानपान और पारंपरिक संगीत से जोडकऱ प्रस्तुत करता है। इससे जैसलमेर के पर्यटन का एक महत्वपूर्ण बदलाव समझ आता है।
- पहले आकर्षण था—किला देखना।
- अब अनुभव है—किला देखना, बाजार घूमना, सफारी करना, धोरों में सूर्यास्त देखना, लोक संगीत सुनना और रेगिस्तानी जीवन को महसूस करना।
- जैसलमेर के पर्यटन में लोक संस्कृति की भूमिका लगातार दिखाई देती है। राजस्थान पर्यटन विभाग डेजर्ट फेस्टिवल में लोक नृत्य, कठपुतली, ऊंट दौड़, ऊंट पोलो और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रमुख आकर्षण के रूप में दर्ज करता है।
- लोक संगीत, पारंपरिक पोशाक, स्थानीय खानपान और रेगिस्तानी जीवनशैली पर्यटक को सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि स्थान की कहानी कहते हैं। यही वह बिंदु है जहां पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था जुड़ते हैं।
- पर्यटन की सफलता के साथ अब विरासत प्रबंधन की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। यूनेस्को ने विजिटर मैनेजमेंट को उच्च प्राथमिकता वाला काम बताया है। इसमें जैसलमेर किले के लिए विजिटर मैनेजमेंट सब-प्लान है।
अद्भुत है जैसलमेर का उदय
कभी शापित शहर के रूप में देखा जाने वाला जैसलमेर अगर आज संसार के दर्शनीय स्थलों में शामिल है, तो यह अपने आप में प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ पर्यटन से जुड़े प्रबंधन का भी कमाल है। इस तरह से पर्यटन मानचित्र पर जैसलमेर का चमकदार नक्षत्र बनना अपने आप में गहन अध्ययन और अन्य शुष्क क्षेत्रों के लिए उदाहरण है।
- वीरेन्द्रसिंह सोढ़ा, पर्यटन विद्