जैसलमेर

महंगी न पड़ जाए सोनार किले की सुरक्षा को लेकर ‘बेपरवाही’ ! बाहरी लोगों के सत्यापन की दरकार

-सोनार किले में कार्य करने वाले बाहरी लोगों के सत्यापन की दरकार -न सुरक्षाकर्मी की नियुक्ति और न ही सीसीटीवी कैमरों की ही नजर
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Sep 17, 2018
jaisalmer
महंगी न पड़ जाए सोनार किले की सुरक्षा को लेकर ‘बेपरवाही’ ! बाहरी लोगों के सत्यापन की दरकार

जैसलमेर. नगरपरिषद क्षेत्र के चार नंबर वार्ड के रूप में पहचाने जाने वाले ऐतिहासिक सोनार किले में अभी बाहरी लोगों की पहचान पुख्ता करने और अनजान चेहरों पर नजर रखने जैसी कोई व्यवस्था आज तक नहीं हो पाई है। यही नहीं किले के महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसी टीवी कैमरे तक लगाने की दिशा में भी कदम फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाए हैं। सोनार दुर्ग में संचालित होने वाली होटल्स तथा अन्य प्रतिष्ठानों में कामकाज को लेकर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा बाहरी राज्यों के लोग रोजगार से जुड़े हुए हैं। कड़वी सच्चाई यह भी है कि रोजगार से जुड़े इन बाहरी लोगों की पृष्ठभूमि क्या है, ये कौन है, पहले क्या करते थे.. जैसे सवालों के जवाब हो सकता है केवल उनके नियोक्ता के पास हो, लेकिन आसपास के लोगों को उनकी कोई जानकारी ही नहीं है। वे दिन बीत गए जब दुर्ग में कोई अनजान चेहरा नजर आते ही स्थानीय लोग तपाक से उसका नाम-पता पूछ लेते और क्यों गलियों में घूम रहा है, यह भी जान लेते। अब यह बीते दिनों की बात हो गई है। हकीकत यह भी है कि देर रात तक लोगों के आवाजाही करने पर धारणा बन चुकी है कि वे किसी होटल या पर्यटन व्यवसायी के कार्मिक होंगे। ऐसे में विश्व धरोहरों की फेहरिस्त में शामिल यह लापरवाही खतरे का सबब भी बन रही है।
आखिर कब होगा पुलिस सत्यापन
ऐतिहासिक सोनार किला विश्व धरोहर के रूप में पहचान बनाने से बहुत पहले एक विशाल परिवार की तरह आबाद रहा है। किले में रहने वाले करीब 450 परिवार वर्षों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी यहां निवास कर रहे हैं। अब सोनार दुर्ग में होटल्स सहित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का भी संचालन हो रहा है। दुर्ग में ऐसे कई लोग भी निवास कर रहे हैं, जो बाहरी है और प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से पर्यटन से जुड़े हुए हैं। इन लोगों का आज तक पुलिस सत्यापन नहीं हो पाया है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हर हादसे की वजह कोई न कोई लापरवाही ही बनती है। ऐसे में दुर्ग में रहने वाले व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले बाहरी लोगों के सत्यापन नहीं होने से चिंता होना लाजमी है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले खुफिया एजेंसियों की पकड़ में आए पाकिस्तानी जासूस नंदू गर्ग ने भी सोशल मीडिया पर किले के दशहरा चौक में खींचे थे, जिन्हें बाद में उसने सोशल मीडिया में अपलोड किया था।

सुरक्षा के लिए यह इंतजाम जरूरी
-पुलिस प्रशासन को चाहिए कि सोनार दुर्ग में रहने वाले बाहरी और होटल व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े बाहरी लोगों का पुलिस सत्यापन शीघ्र हो।

-सोनार किले में रात्रि के समय अखे प्रोल व दशहरा चौक में चौकीदार की नियुक्ति की जाए, जिसके पास रात्रि में आने वाले बाहरी लोगों का ब्यौरा रखने का अधिकार हो।

-विश्व धरोहरों में शामिल सोनार दुर्ग के पर्यटन स्थलों व सार्वजनिक स्थानों के अलावा प्रोलों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि हर आवाजाही करने वाले पर नजर रखी जा सके।
-सोनार दुर्ग में काम करने वाले कार्मिकों के बैज बनवाए जाने की जरूरत है, जिससे कि यह पता चल सके कि अमुक व्यक्ति किस जगह और कब से कार्य कर रहा है।

Published on:
17 Sept 2018 07:38 am