
रामदेवरा. प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल बाबा रामदेव के वार्षिक भादवा मेले के आगाज में अब करीब डेढ़ माह का समय शेष है, लेकिन प्रशासनिक तैयारियां अब तक अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी हैं। आगामी 13 सितंबर से शुरू होने वाले मेले को लेकर अभी तक न तो उपखंड स्तर पर विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई है और न ही जिला स्तर पर सभी विभागों की समन्वय बैठक हुई है। इससे स्थानीय लोगों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों में चिंता बढ़ने लगी है।भादवा मेले में हर वर्ष राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों से 30 से 50 लाख श्रद्धालुओं के रामदेवरा पहुंचने का अनुमान रहता है। मेले के दौरान कस्बे की आबादी कई गुना बढ़ जाती है और अस्थायी रूप से पूरा क्षेत्र एक बड़े धार्मिक नगर का स्वरूप ले लेता है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए पेयजल, विद्युत, चिकित्सा, सफाई, यातायात, पार्किंग, कानून-व्यवस्था, अग्निशमन, अस्थायी शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम, आपदा प्रबंधन, रेलवे और रोडवेज जैसी व्यवस्थाओं के लिए समय रहते विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक माना जाता है। फिलहाल इस दिशा में व्यापक प्रशासनिक समीक्षा नहीं होने से तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
सामान्यतः मेले से पहले जिला प्रशासन सभी संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक आयोजित कर जिम्मेदारियां तय करता है। इसके बाद उपखंड स्तर पर अलग-अलग बैठकों में तैयारियों की समीक्षा होती है। पुलिस, चिकित्सा, जलदाय, विद्युत निगम, सार्वजनिक निर्माण विभाग, पंचायती राज, परिवहन, रेलवे, नगर निकाय, अग्निशमन तथा मंदिर समिति सहित सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है। इस बार अब तक ऐसी कोई समीक्षा बैठक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
रामदेवरा क्षेत्र में पेयजल, बिजली, सड़क और अग्निशमन जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कस्बे में स्थायी दमकल वाहन की सुविधा नहीं है और कई बार विद्युत आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित होती रही है। ऐसे में लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के दौरान व्यवस्थाओं को समय रहते सुदृढ़ करना आवश्यक माना जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बाजार, पार्किंग, यातायात और सफाई जैसी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए प्रशासन को शीघ्र बैठक बुलानी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते विभागों की जिम्मेदारियां तय नहीं हुईं तो मेले के दौरान श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
हर वर्ष सावन मास शुरू होते ही देश के विभिन्न हिस्सों से पैदल यात्रियों और श्रद्धालुओं का रामदेवरा पहुंचना शुरू हो जाता है। मेले के औपचारिक शुभारंभ से पहले ही लाखों श्रद्धालु बाबा रामदेव की समाधि पर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पेयजल, बिजली, चिकित्सा, सफाई, सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, अस्थायी आवास, सड़क मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और जल निकासी जैसी व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त होना आवश्यक है। इस बार मानसून के दौरान मेला आयोजित होने से चुनौती और बढ़ गई है। बारिश की स्थिति में जलभराव, कीचड़ और यातायात अव्यवस्था जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करना और जल निकासी के प्रभावी इंतजाम करना प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल अधिकांश व्यवस्थाओं पर ठोस कार्य प्रारंभ नहीं होने से चिंता लगातार बढ़ रही है।