
पोकरण. पोकरण में स्थित राजकीय महाविद्यालय को जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से स्थायी सम्बद्धता प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2006 में महाविद्यालय की स्थापना के बाद से ही यहां प्राचार्य का पद अधिकांश समय रिक्त ही रहा। हालांकि बीच-बीच में कई बार प्राचार्यों की नियुक्ति हुई, लेकिन किसी ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया, तो कोई यहां चंद दिन बाद चले गए। जानकार बताते हैं कि स्थायी सम्बद्धता 3 से 5 वर्षों मिल जानी चाहिए थी, लेकिन रुचि नहीं दिखाए जाने से यहां 12 वर्ष का समय लग गया। फिलहाल उम्मीद जताई जा रही है कि महाविद्यालय स्टाफ व विद्यार्थियों को अधिक सुविधाएं मिल सकेगी। गौरतलब है कि वर्ष 2006 में पोकरण में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना की गई थी। इसके बाद से ही स्थायी सम्बद्धता को लेकर प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन 12 वर्षों बाद स्थाई सम्बद्धता का सपना अब साकार हो पाया है।
निरीक्षण दल ने की अनुशंसा
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.एनके व्यास ने बताया कि गत वर्ष विश्वविद्यालय से संपर्क कर स्थायी सम्बद्धता की विधिवत प्रक्रिया शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से निरीक्षण के लिए एक टीम यहां भिजवाई गई थी। टीम की ओर से महाविद्यालय भवन व रिकॉर्ड का निरीक्षण करने बाद के बाद अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सुपुर्द की गई। जिस पर विश्वविद्यालय की ओर से स्थायी सम्बद्धता दी गई है।
अब मिलेगी रेंक व वित्तीय सहायता
प्राचार्य डॉ.व्यास ने बताया कि सम्बद्धता पत्र जारी होने के बाद अब यूजीसी से 2 तथा 12बी में मान्यता मिलेगी। इसके बाद नैक ग्रेडिंग देगी। इस गे्रेडिंग के आधार पर ही अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकेगी, जिससे महाविद्यालय में विकास कार्य करवाए जाएंगे तथा छात्र छात्राओं को सुविधाएं प्रदान की जाएगी।
सुविधाओं का होगा विस्तार
-खेल मैदान में हो सकेगा निर्माण कार्य
-पुस्तकालय के लिए अलग से अच्छी व्यवस्था
-नई पुस्तकों का किया जा सकेगा संग्रहण
-व्याख्याता विभिन्न विषयों पर कर सकेंगे शोध कार्य
-महाविद्यालय भवन अतिरिक्त कक्षों में करवा सकेंगे निर्माण कार्य
-जरुरत के अनुसार छात्रावास का भी हो सकेगा निर्माण
-महाविद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए मिल सकेगी राशि
-विद्यार्थियों के केरियर गाइडेंस के लिए लगा सकेंगे अतिरिक्त कक्षाएं