
महिला टोलियां घरों तक पहुंची
जैसलमेर. किसी घर का दरवाजा खुलता है। सामने मोहल्ले की परिचित महिला खड़ी है। कुछ मिनट हालचाल पूछने के बाद बातचीत अचानक चुनाव पर आ जाती है। किसे वोट देना है, वार्ड में क्या बदला, क्या नहीं बदला और अगली बार किससे उम्मीद है—यही संवाद अब कई वार्डों में चुनावी प्रचार का नया चेहरा बन रहा है। कई प्रत्याशियों ने महिला मतदाताओं तक पहुंचने के लिए बड़े आयोजनों के बजाय छोटे, भरोसेमंद और व्यक्तिगत नेटवर्क को सक्रिय करना शुरू किया है। महिला समर्थकों की टोलियां अलग-अलग गलियों और घरों तक पहुंच रही हैं। खास बात यह है कि यहां प्रचार का अंदाज भाषण वाला नहीं, बल्कि बातचीत वाला है। परिचित महिला की बात को मतदाता राजनीतिक अपील से ज्यादा सहजता से सुनता है।
-महिला समर्थक मोहल्लों में घर-घर संपर्क की जिम्मेदारी संभाल रहीं।
-रिश्तेदारी, पड़ोस और सामाजिक पहचान प्रचार का आधार बन रही।
-महिलाओं से मिले फीडबैक पर प्रत्याशी रणनीति बदल रहे।
-पानी, सफाई, सडक़ और सुरक्षा जैसे मुद्दे बातचीत में प्रमुख।
-छोटी टोलियां बड़े प्रचार खर्च का विकल्प बनकर उभरीं।
-घरों तक पहुंचा संदेश परिवार के दूसरे मतदाताओं तक पहुंचा।
अभियान का मकसद केवल वोट मांगना नहीं है। प्रत्याशी यह भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि किस घर में चुनाव को लेकर क्या माहौल है। महिला टीमों से मिली जानकारी के आधार पर ऐसे घरों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां दोबारा संपर्क की जरूरत है या जहां स्थानीय मुद्दों को लेकर नाराजगी है। यही वजह है कि महिला जनसंपर्क को कई प्रत्याशी चुनावी प्रचार के साथ-साथ ग्राउंड फीडबैक सिस्टम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। एक छोटी बातचीत कई बार उस राजनीतिक संकेत को सामने ला देती है, जो बड़ी सभा में दिखाई नहीं देता।
महिला मतदाताओं की बातचीत में वार्ड की रोजमर्रा की समस्याएं ज्यादा प्रमुखता से सामने आ रही हैं। पानी की उपलब्धता, सफाई व्यवस्था, नालियों की स्थिति, स्ट्रीट लाइट, सडक़, सार्वजनिक सुविधाएं और बच्चों से जुड़े मुद्दे चर्चा में आ रहे हैं। इन बातचीतों का दूसरा असर यह है कि चुनावी भाषणों के बड़े मुद्दों की जगह प्रत्याशी अब वार्ड-विशेष के छोटे मुद्दों पर ज्यादा बात कर रहे हैं। यानी जिस गली में पानी समस्या है, वहां पानी; जहां सफाई मुद्दा है, वहां सफाई—प्रचार का संदेश भी ज्यादा स्थानीय होता जा रहा है।
महिला नेटवर्क की असली ताकत उसकी संख्या नहीं, उसकी पहुंच है। पांच-दस महिलाओं की टीम भी यदि किसी मोहल्ले में वर्षों से बने सामाजिक रिश्तों के सहारे सक्रिय है तो उसका प्रभाव बड़े प्रचार वाहन से बड़ा माना जाता है। यही कारण है कि कई प्रत्याशी अब समर्थकों को केवल भीड़ जुटाने के लिए नहीं, बल्कि मोहल्लेवार संपर्क की जिम्मेदारी दे रहे हैं। कौन सी गली किसके जिम्मे होगी, किन परिवारों से दोबारा संपर्क करना है और मतदान के दिन किन समर्थकों को सक्रिय रखना है—इन सबकी अनौपचारिक रणनीति तैयार हो रही है।
फैक्ट फाइल: जैसलमेर नगर परिषद चुनाव
-17,478 महिला मतदाता नगर परिषद क्षेत्र में चुनावी फैसला करेंगी
-44 वार्डों में पार्षद चुनने के लिए मतदान होगा
-36,642 कुल मतदाता इस चुनाव में मताधिकार का प्रयोग करेंगे
-एक वार्ड में महिला प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन पहले ही हो चुका
निकाय चुनाव में महिला नेटवर्क इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वार्ड स्तर पर व्यक्तिगत पहचान और सामाजिक संबंध सीधे चुनावी व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। महिला मतदाताओं से सीधा संवाद प्रत्याशी को दोहरा लाभ देता है—पहला, परिवार तक पहुंच; दूसरा, स्थानीय मुद्दों का वास्तविक फीडबैक। लेकिन संपर्क को वोट में बदलने के लिए अंतिम चरण में बूथ स्तर की सक्रियता निर्णायक रहेगी।
- शैलेष जोशी, राजनीतिक विश्लेषक
Updated on:
6 Sep 2026, 8:45 PM IST
Published on:
6 Sep 2026, 8:44 PM IST
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