जैसलमेर

Jaisalmer: सात साल का इंतजार, एक महीने पहले शादी और अधूरा रहा गया सफर

एक महीने पहले शुरू हुआ वैवाहिक जीवन उस वक्त थम गया, जब जैसलमेर में हुए सड़क हादसे ने मेजर हमजा आरिफ को परिवार से हमेशा के लिए दूर कर दिया। थईयात सैन्य क्षेत्र के निकट ऊंट से टकराई एसयूवी दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें मेजर की उपचार के दौरान मौत हो गई। नई जिंदगी के सपनों के बीच आई इस दुखद खबर ने परिवार, साथियों और सैन्य समुदाय को गहरे शोक में डुबो दिया।
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Aug 01, 2026
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दिवंगत मेजर हमजा आरिफ की अपनी पत्नी के साथ फोटो। - फाइल

जैसलमेर. रात काफी हो चुकी थी। सेना परिसर स्थित घर में ज्योति दरवाजे पर हर आहट के साथ उम्मीद बांध रही थीं। मेजर हमजा आरिफ लौटने वाले थे। नई शादी, नया घर और भविष्य की नई योजनाओं के बीच यह एक सामान्य इंतजार था। लेकिन उस रात दरवाजे पर दस्तक मेजर की नहीं, बल्कि ऐसी खबर की थी जिसने एक महीने पहले शुरू हुए वैवाहिक जीवन को हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया। गुरुवार देर रात जैसलमेर के थईयात सैन्य क्षेत्र के निकट हुए भीषण सडक़ हादसे में भारतीय सेना के मेजर हमजा आरिफ की मृत्यु हो गई। उनकी नई एसयूवी अचानक सडक़ पर आए ऊंट से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन कई बार पलटता हुआ दूर तक घिसट गया। सेना अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके साथ मौजूद दो अधिकारी घायल हुए हैं और उनका उपचार जारी है।

विवाह के बाद पहली बार जैसलमेर आई थी ज्योति

करीब एक माह पहले ही हमजा और ज्योति ने सात वर्षों के रिश्ते को विवाह का नाम दिया था। दोनों ने परिवारों को मनाया, भविष्य की योजनाएं बनाई और नई जिंदगी की शुरुआत की। विवाह के बाद ज्योति पहली बार उनके साथ जैसलमेर आई थीं। मेहंदी का रंग अभी पूरी तरह फीका भी नहीं पड़ा था कि जिंदगी ने उनसे जीवनसाथी छीन लिया। इससे पूर्व इंदौर के धन्वंतरि नगर स्थित घर में भी खुशियों का माहौल था। दिसंबर में नवदंपती के स्वागत का कार्यक्रम तय किया जा रहा था। रिश्तेदारों को बुलाने की चर्चा शुरू हो चुकी थी। लेकिन नियति ने ऐसा मोड़ लिया कि जिस बेटे के स्वागत की तैयारियां थीं, उसी की अंतिम यात्रा की तैयारी करनी पड़ी। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा, तो पूरे मोहल्ले की आंखें नम थीं। मेजर हमजा आरिफ परिवार के इकलौते बेटे थे। वर्ष 2017 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में चयन के बाद उन्होंने सेना में अपना सफर शुरू किया। लेफ्टिनेंट, कैप्टन और फिर मेजर तक का सफर उन्होंने अपनी मेहनत से तय किया। कुछ दिन पहले ही उन्हें पदोन्नति मिली थी। नई जिम्मेदारी की खुशी में उन्होंने नई गाड़ी खरीदी थी। किसी ने नहीं सोचा था कि यही वाहन उनके जीवन का आखिरी सफर बन जाएगा।

मोबाइल पर बेटे की तस्वीरें देख रहे 83 वर्षीय फखरुद्दीन

उधर, इंदौर में 83 वर्षीय पिता फकरूद्दीन हमजा बार-बार मोबाइल में बेटे की तस्वीरें देखते रहे। कभी उसकी पासिंग आउट परेड तो कभी वर्दी में मुस्कुराता चेहरा।आंखों से आंसू पोंछते हुए उन्होंने इतना ही कहा—वह सिर्फ मेरा बेटा नहीं था, पूरे परिवार की उम्मीद और समाज का गौरव था। शनिवार सुबह जैसलमेर सैन्य स्टेशन में साथी अधिकारियों और जवानों ने अंतिम सलामी देकर मेजर हमजा आरिफ को विदा किया। इसके बाद पार्थिव शरीर विशेष विमान से इंदौर भेजा गया।

Updated on:
01 Aug 2026 08:35 pm
Published on:
01 Aug 2026 08:35 pm