जैसलमेर

Jaisalmer: संडे बोल – आपकी आवाज, आज का सवाल- शहर से लेकर गांवों तक में सडक़ हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

सीमावर्ती जैसलमेर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सडक़ों पर आए दिन वाहन हादसाग्रस्त हो रहे हैं। जिसमें जान-माल की अपूरणीय क्षति होती है। इन हादसों के लिए कई बार जहां हालात जिम्मेदार होते हैं, वहीं वाहन चालकों की लापरवाही भी देखने में आती है।
2 min read
Jul 25, 2026
jaisalmer photo
जैसलमेर में क्षतिग्रस्त सड़कें बनी हादसे का सबब

संडे बोल - आपकी आवाजआज का सवाल - शहर से लेकर गांवों तक में सडक़ हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन हादसों के लिए परिस्थितियों के अलावा वाहन चालकों की लापरवाही कितनी जिम्मेदार है और हादसों पर किस तरह अंकुश लगे?

सीमावर्ती जैसलमेर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सडक़ों पर आए दिन वाहन हादसाग्रस्त हो रहे हैं। जिसमें जान-माल की अपूरणीय क्षति होती है। इन हादसों के लिए कई बार जहां हालात जिम्मेदार होते हैं, वहीं वाहन चालकों की लापरवाही भी देखने में आती है।

हादसों के लिए लापरवाही भी जिम्मेदार

हर सडक़ हादसे के पीछे केवल खराब सडक़ें नहीं, बल्कि किसी न किसी की लापरवाही होती है। नियम तोडऩे वाला केवल अपनी नहीं, दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डालता है। सडक़ हादसे दुर्घटना कम और लापरवाही का परिणाम ज्यादा होते हैं। अगर हर चालक नियमों का पालन करे, तो हजारों जानें बच सकती हैं।

- भीमाराम डांगरी

हालात से ज्यादा चालकों की जिम्मेदारी

सडक़ हादसों में खराब सडक़ों या प्राकृतिक परिस्थितियों से कहीं ज्यादा जिम्मेदारी वाहन चालकों की लापरवाही की होती है। तेज रफ्तार, ड्राइविंग के समय मोबाइल का इस्तेमाल, नशे में गाड़ी चलाना और गलत दिशा में चलने जैसी गलतियां ही अधिकतर जानलेवा हादसों का मुख्य कारण बनती हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए सबसे पहले ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को बेहद सख्त और पारदर्शी बनाना होगा।

- भरत परिहार

टूटी सडक़ें बनी परेशानी का सबब

जैसलमेर शहर की इंदिरा कॉलोनी क्षेत्र में टूटी हुई सडक़ों से राहगीरों एवं वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में यह परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में हर समय बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है। सडक़ पर जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कत होती है।

- गजेन्द्र गिरि

जन जागरुकता अभियान चलाया जाए

दुर्घटना के बाद अस्पताल पहुंचने वाले कई मामलों में यह स्पष्ट होता है कि यदि हेलमेट और सीट बेल्ट का सही उपयोग किया जाता तो जान बच सकती थी। कई चालक थकान, नींद या नशे की हालत में वाहन चलाते हैं, जिससे हादसे बढ़ते हैं। सडक़ सुरक्षा को लेकर स्कूलों से लेकर समाज तक लगातार जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

- उपेन्द्र गोगली, काहला

Updated on:
25 Jul 2026 08:31 pm
Published on:
25 Jul 2026 08:31 pm