पर्यटन नगरी जैसलमेर में जुलाई से पर्यटन सीजन का आगाज माना जाता है। उसके बाद अगस्त-सितम्बर से देशी-विदेशी मेहमानों की तादाद में निरंतर बढ़ोतरी होती जाती है।
पर्यटन नगरी जैसलमेर में जुलाई से पर्यटन सीजन का आगाज माना जाता है। उसके बाद अगस्त-सितम्बर से देशी-विदेशी मेहमानों की तादाद में निरंतर बढ़ोतरी होती जाती है। इस लिहाज से देखा जाए तो पर्यटन सीजन के बीच फासला अब कुछ दिनों का ही रह गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि, क्या मेहमानों का स्वागत करने के लिए पीत पाषाणों का शहर पूरी तरह से तैयार है? सीजन के समय लाखों की संख्या में सैलानी जैसलमेर पहुंचते हैं। वे यहां दर्शनीय स्थलों का अवलोकन करने के साथ बाजारों का भी भ्रमण करते हैं और उन्हें कई सुविधाओं की दरकार होती है। निजी क्षेत्र के लोग तो अपने व्यवसाय को लेकर फिक्रमंद रहते हैं और यही कारण है कि वे सीजन में आने वाले सैलानियों के स्वागत के लिए तत्पर रहते हैं लेकिन सरकारी महकमों के बीच आपसी तालमेल का अभाव साफ नजर आता है। पत्रिका टीम ने शहर का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो जो तस्वीर सामने आई, वह बहुत उत्साहित करने वाली नहीं है। अभी भी सौन्दर्यकरण से लेकर बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई काम चल रहे हैं तो कुछ की खैर-खबर नहीं ली जा रही है।
दुर्ग में प्रवेश करने के लिए बनी अखे प्रोल के बाएं हिस्से में पूर्व में बने चुग्गाघर को हटा कर उसके स्थान पर फर्श निर्माण का कार्य वर्तमान में जारी है। चुग्गाघर को कई महीनों पहले हटाया गया था, उसके बाद इस काम को शुरू करवाने में काफी समय लग गया। इसमें काफी समय तक तो एएसआई की तरफ से लगाए गए ध्वज को हटवाने और उसके प्लेटफार्म को तोडऩे में समय खर्च किया गया। वर्तमान में यहां श्रमिक काम पर जुटे हुए हैं। अभी यह नहीं बताया जा रहा है कि इसके आगे से टैक्सी स्टैंड हटेगा या नहीं?
सोनार दुर्ग की प्राचीर के जर्जर हिस्सों में नई दीवार बनाने का काम कई जगहों पर एएसआई की तरफ से करवाया जा रहा है। लेकिन इस कार्य की गति काफी धीमी है। शिव मार्ग पर तीन-चार जगहों पर बेरिकैड लगा कर काम किए जाने से मार्ग संकरा हो गया है। दिन में कई-कई बार जाम लग जाता है। आने वाले दिनों में सैलानियों की आवक में बढ़ोतरी होने से यह समस्या और विकट होगी। इसके अलावा तेज बारिश के दौरान खुली हुई दीवार का हिस्सा और क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी बना हुआ है।
शहर में कई अहम सडक़ों पर गड्ढों की समस्या लम्बे समय से बनी हुई है। इन गड्ढों को भरने का काम अभी तक नगरपरिषद ने हाथ में नहीं लिया है। सडक़ों की दुर्दशा घटिया गुणवत्ता के कारण हुआ है। कुछ महीनों पहले बनी नई सडक़ों में जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं जबकि अभी बारिश का सीजन आना शेष है। हनुमान चौराहा से गीता आश्रम जाने वाले मार्ग, शिव मार्ग से रिंग रोड की तरफ जाने वाली सडक़, किले की ओर जाने वाली रोड से लेकर अन्य प्रमुख बाजारों तक सडक़ों पर मरम्मत की जरूरत महसूस की जा रही है।