जैसलमेर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘वायुशक्ति-2026’ से पहले स्वदेशी LCH ‘प्रचंड’ में सह-पायलट के रूप में 25 मिनट उड़ान भरी। पोकरण रेंज में राफेल, सुखोई सहित 120 से अधिक विमान शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
Vayu Shakti 2026: जैसलमेर/पोकरण: राजस्थान का सरहदी जिला जैसलमेर शुक्रवार को एक अभूतपूर्व सैन्य गौरव का साक्षी बना। भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) 'प्रचंड' के कॉकपिट में बैठकर आसमान की ऊंचाइयों को नापा।
बता दें कि यह देश के इतिहास में पहला अवसर है, जब किसी राष्ट्रपति ने जैसलमेर के संवेदनशील सीमावर्ती एयरस्पेस में एक लड़ाकू हेलीकॉप्टर में बतौर सह-पायलट उड़ान भरी है। राष्ट्रपति मुर्मू सुबह करीब 9:15 बजे जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पहुंचीं। जहां एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने उनकी अगवानी की।
सेना के अधिकारियों द्वारा 'प्रचंड' की मारक क्षमता पर ब्रीफिंग दिए जाने के बाद, राष्ट्रपति ने फ्लाइंग सूट पहनकर कॉकपिट में प्रवेश किया। सुबह 10:15 बजे ग्रुप कैप्टन एनएस बहुआ की कमान में हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी।
लगभग 25 मिनट की इस साहसिक उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज और ऐतिहासिक 'शक्ति स्थल' (परमाणु परीक्षण स्थल) का हवाई जायजा लिया। कॉकपिट से मुस्कुराते हुए राष्ट्रपति का 'सैल्यूट' करना आत्मनिर्भर भारत की रक्षा शक्ति और नारी शक्ति के अद्भुत संगम को दर्शा रहा था। इससे पूर्व राष्ट्रपति सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे घातक लड़ाकू विमानों में भी उड़ान भर चुकी हैं।
राष्ट्रपति की इस उड़ान ने शाम को होने वाले भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े युद्धाभ्यास 'वायुशक्ति-2026' की नींव रख दी है। आज शाम करीब 5 बजे राष्ट्रपति मुर्मू, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में पोकरण की रेंज बारूद की गंध और जेट इंजनों की गर्जना से दहल उठेगी।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित 'प्रचंड' दुनिया का इकलौता ऐसा अटैक हेलीकॉप्टर है, जो 5,000 मीटर की ऊंचाई पर लैंडिंग और टेक-ऑफ कर सकता है। राष्ट्रपति की यह उड़ान न केवल सेना के 'आकाशवीरों' का उत्साहवर्धन करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर 'मेक इन इंडिया' की ताकत का भी लोहा मनवाएगी।
सुरक्षा के लिहाज से चांदन से पोकरण तक के क्षेत्र को 'नो-फ्लाई जोन' घोषित किया गया है। उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने वायुसेना के अधिकारियों के साथ संवाद किया और विजिटर्स बुक में अपने अनुभव साझा किए। आज शाम का युद्धाभ्यास यह सिद्ध करेगा कि भारतीय वायुसेना किसी भी स्थिति में दुश्मन की कमर तोड़ने के लिए पूरी तरह सुसज्जित और तैयार है।