
Jalore Jaswantpura Hostel Case: जालोर जिले के जसवंतपुरा में साल 1935 से संचालित छात्रावास को आखिरकार 91 साल बाद अपनी जमीन का हक मिल गया है। करीब चार साल पहले रातों-रात किए गए अतिक्रमण के बाद स्कूल प्रशासन और ग्रामीणों ने केस दायर किया था, जिसके पक्ष में न्यायालय ने 23 जुलाई 2026 को फैसला दिया।
जालोर अतिरिक्त जिला कलक्टर की ओर से सुनाए गए इस फैसले में कहा गया कि राज्य सरकार की अधिसूचना की पालना के अनुसार पूर्ण प्रक्रिया अपनाने के बाद राजकीय बॉयज हॉस्टल, राउमावि जसवंतपुरा को 7 अगस्त 2023 को ग्राम पंचायत ने पट्टा जारी किया। निर्णय में यह भी उल्लेख किया गया कि ग्राम पंचायत की ओर से लिए गए सर्वसम्मत निर्णय में कोई हस्तक्षेप किया जाना उचित एवं न्यायोचित नहीं है।
साल 2022 में अतिक्रमण का विरोध करने पहुंचे ग्रामीणों ने अतिक्रमण की नीयत से घुसे लोगों के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं, तत्कालीन प्रिंसिपल विक्रम सिंह चारण की ओर से ताला और मीटर चोरी का प्रकरण भी दर्ज कराया गया। इस पूरे प्रकरण में ग्रामीण, विद्यालय प्रशासन और विद्यार्थी सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन किया। करीब आठ घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद तत्कालीन जसवंतपुरा थानाधिकारी को रिसीवर नियुक्त करने और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।
राणा नृपालदेव राजपूत सेवा समिति ने इसे अपने समाज का छात्रावास बताते हुए दावा जताया था और वर्ष 2021 में पट्टे के लिए ग्राम पंचायत में प्रार्थना पत्र लगाया था। लेकिन पंचायत ने मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसके बाद 31 जनवरी 2022 को रातों-रात कुछ लोग इसी सरकारी छात्रावास भवन में अतिक्रमण की नीयत से प्रवेश कर गए, जिस पर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया।
एडीएम कोर्ट ने विद्यालय के हक में निर्णय दिया है। पूर्व में यहां बॉयज हॉस्टल ही था। दानदाताओं के सहयोग से यहां बॉयज हॉस्टल का ही निर्माण करवाया जाना है।
-दिनेश कुमार विश्नोई, प्रिंसिपल, पीएमश्री राउमावि, जसवंतपुरा