Gangster Raju Manju Arrested: एएनटीएफ टीम ने गैंगस्टर राजू मांजू को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की। पश्चिमी राजस्थान में दहशत फैलाने वाला यह आरोपी कई गंभीर वारदातों में शामिल रहा है और बड़ी घटना की फिराक में था।
जालोर। एएनटीएफ टीम जयपुर और चौकी जोधपुर की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 75 हजार रुपए के इनामी आरोपी गैंगस्टर राजू मांजू को गिरफ्तार किया। आरोपी ने 2015 के आसपास सड़क निर्माण में लगी टोल कंपनियों से ठेके लेने और वसूली करने से माफियागिरी शुरू की। इसके खिलाफ टोल कंपनियों से संबंधित करीब 14 प्रकरण दर्ज हैं।
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भारतमाला एक्सप्रेस-वे परियोजना के नेटवर्क के अधिकारियों को भी इस पर धमकाने के आरोप हैं। आईजी विकास कुमार के अनुसार वर्ष 2013 से ही राजू मांजू अपराध की दुनिया में कदम रख चुका था। पिछले 13 साल में उस पर तीन दर्जन प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। दर्ज प्रकरणों में हत्या, हत्या का प्रयास, लूटपाट, अपहरण, मारपीट, आर्म्स एक्ट, मादक पदार्थों की तस्करी, धमकी, वसूली, आगजनी, पुलिस पर हमला जैसे संगीन अपराधों की पूरी श्रृंखला शामिल है। क्रिकेट खेलते समय कहासुनी में मारपीट से अपराध का सफर शुरू करने के बाद आरोपी पश्चिमी राजस्थान में डॉन के रूप में पैर पसारना चाहता था।
2017-18 में ही राजू मांजू ने अपने गुरु श्याम पुनिया के साथ मिलकर इलाके में 007 गैंग का गठन किया था। श्याम पुनिया के जेल जाने के बाद राजू स्वयं गैंग का सरगना बन बैठा। इलाके में प्रतिद्वंदी गैंगों जैसे 0029 गैंग, सरपंच गैंग और उजाराम गैंग के साथ उसकी जबरदस्त टक्कर चलती थी। एक-दूसरे को मारने-मरने पर आमादा गैंगस्टर फिल्मी अंदाज में एक-दूसरे पर हमला करते थे।
पश्चिमी राजस्थान के लोगों ने सड़कों पर गोलाबारी और खूनखराबा पहली बार राजू मांजू गैंग के कारण ही देखा। प्रतिद्वंदियों को सड़कों पर वाहनों के साथ खदेड़ते हुए लगातार फायरिंग करना, टक्कर मारना और हत्या का प्रयास करना राजू मांजू का खास तरीका रहा है। चाहे कुख्यात सुरेश खिलेरी की हत्या का मामला हो, ठाड़िया गांव में बिश्नाराम गैंग के साथ गैंगवार हो या 0029 गैंग के सदस्यों पर फलोदी और बज्जू इलाके में हमला करना हो, हर बार राजू का वारदात का तरीका यही रहा करता था।
राजू मांजू कई दिनों से किसी बड़ी वारदात की फिराक में जयपुर के चक्कर लगा रहा था। वह गोपनीय तरीके से अपने पुराने साथियों से संपर्क कर हथियारों की व्यवस्था करने की कोशिश में था। उसके एक पुराने साथी से ईर्ष्या रखने वाले एक सहयोगी ने चुपके से यह सूचना एएनटीएफ तक पहुंचा दी। उसी पुराने साथी के जरिए जयपुर का हथियार सप्लायर बनकर एएनटीएफ टीम ने राजू मांजू से संपर्क साधा।
कई दिनों की बातचीत के बाद राजू का विश्वास टीम पर बन गया, लेकिन शातिर राजू मिलने को तैयार नहीं हो रहा था। वह हमेशा ऑनलाइन सौदे और पार्सल के जरिए माल पहुंचाने की बात करता था। टीम ने उसे कई बार अंतिम बातचीत के लिए मिलने को कहा, लेकिन वह मानता नहीं था। आखिरकार राजू तैयार हुआ और अपनी चुनी हुई जगह पर अचानक आकर मिलने पहुंचा, जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया।