
जालोर। जालोर जिले के छोटे से गांव सियाणा की मिट्टी में निशानेबाजी का सपना देखने वाली माहेश्वरी चौहान ने अब जापान तक तिरंगा फहरा दिया। उनके इस सफर के पीछे परिवार की तीन पीढ़ियों की शूटिंग विरासत और पिता प्रदीप सिंह चौहान की वह पहल है, जिसने गांव से करीब छह किलोमीटर दूर आकोली रोड पर 18 बीघा जमीन में निजी शूटिंग रेंज खड़ी कर दी। इसी रेंज में माहेश्वरी ने दादा गणपत सिंह, पिता प्रदीप सिंह और भाई दक्षेश्वर सिंह के साथ निशानेबाजी की बारीकियां सीखीं।
पिता के अनुसार माहेश्वरी को करीब 15 साल की उम्र से शूटिंग का शौक लगा। वर्ष 2012 से उसने स्टेट और नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए सात नेशनल गोल्ड मेडल जीते। 2017 में पोपेटो में हुए जूनियर निशानेबाजी वर्ल्ड कप में पहला अंतरराष्ट्रीय पदक सिल्वर रहा। इसके बाद ओलम्पिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी देश का प्रतिनिधित्व किया।
जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला स्कीट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। भारतीय तिकड़ी ने फाइनल में कुल 331 अंक हासिल किए। इस टीम की अहम सदस्य जालोर जिले की माहेश्वरी चौहान रहीं। पेरिस ओलम्पिक में मामूली अंतर से पदक से चूकने वाली माहेश्वरी ने एशियन गेम्स में शानदार वापसी करते हुए कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी इस उपलब्धि से जालोर जिले में खुशी की लहर है। सियाणा गांव से जापान तक का माहेश्वरी का सफर जिले के युवाओं के लिए प्रेरणादायी बन गया है।
माहेश्वरी की शादी केलवा (उदयपुर) में हुई है। उनके पति अजयराजसिंह राठौड़ भी नेशनल स्तर पर निशानेबाजी कर चुके हैं। माहेश्वरी की सफलता पर सियाणा में ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारतीय तिकड़ी को बधाई दी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी माहेश्वरी को बधाई दी। माहेश्वरी चौहान ने कहा कि परिवार ने मेरी इच्छा के अनुरूप हमेशा प्रेरित किया। शादी के बाद भी यह सिलसिला जारी है। शूटिंग के कारण मुझे खुशी है कि मैं सियाणा जैसे छोटे क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान का आधार बन रही हूं।
माहेश्वरी चौहान का जन्म जालोर जिले के सियाणा गांव में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई के साथ उन्हें शूटिंग का शौक था। बेटी की प्रतिभा को पहचानते हुए पिता प्रदीप सिंह ने सियाणा से करीब छह किलोमीटर दूर आकोली रोड पर 18 बीघा जमीन में निजी शूटिंग रेंज तैयार करवाई। इसी रेंज में माहेश्वरी ने अपने दादा गणपत सिंह, पिता प्रदीप सिंह चौहान और भाई दक्षेश्वर सिंह के साथ शूटिंग की बारीकियां सीखीं। खास बात यह है कि माहेश्वरी के दादा गणपत सिंह और पिता प्रदीप सिंह भी राष्ट्रीय स्तर तक शूटिंग में खेल चुके हैं। परिवार में मिले इसी खेल माहौल ने माहेश्वरी के सपनों को उड़ान दी।
दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई के साथ निशानेबाजी जारी रखने वाली माहेश्वरी ने पेरिस ओलम्पिक में मामूली अंतर से पदक गंवाने के बाद भी अभ्यास नहीं छोड़ा। अब एशियन गेम्स 2026 में राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल के साथ महिला स्कीट टीम में कांस्य पदक जीता। भारतीय टीम ने 331 अंक जुटाए। यह महिला स्कीट में भारत का पहला एशियन गेम्स पदक है।