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Rajasthan: बहुचर्चित जालमसिंह हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी की अंतरिम जमानत खारिज

सांचौर के चर्चित जालमसिंह हत्याकांड में आरोपी चनणाराम विश्नोई को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। आरोपी ने बेटे की शादी में शामिल होने के लिए एक महीने की अंतरिम जमानत मांगी थी, लेकिन सुनवाई के दौरान सामने आया कि विवाह का निर्धारित कार्यक्रम जून 2026 में ही समाप्त हो चुका है।
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जालोर

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Kamal Mishra

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Updated: 6 Nov 2026, 10:35 AM IST

rajasthan high court

Rajasthan High Court : फाइल फोटो- पत्रिका।

जालोर। राजस्थान के बहुचर्चित जालमसिंह हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी चनणाराम विश्नोई को राहत देने से इनकार कर दिया है। बेटे की शादी में शामिल होने और पिता की ओर से विवाह की रस्में निभाने के लिए मांगी गई एक महीने की अंतरिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने परिवादी की ओर से पेश किए गए तर्कों पर सहमति जताते हुए यह फैसला सुनाया। मामले की सुनवाई न्यायाधीश जस्टिस कुलदीप माथुर ने की।

चनणाराम विश्नोई की ओर से हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया गया था। इसमें बताया गया कि उसके बेटे कुलदीप का विवाह समारोह 14 जून से 28 जून 2026 तक प्रस्तावित था। चनणाराम के पिता का निधन हो चुका है, ऐसे में बेटे की शादी में पिता की ओर से निभाई जाने वाली विभिन्न रस्मों के लिए उसकी मौजूदगी जरूरी है। इसी आधार पर उसे एक महीने की अंतरिम जमानत देने की मांग की गई थी। हालांकि, जब याचिका सुनवाई के लिए लगी तो आरोपी की ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इस दौरान परिवादी अनोप सिंह की ओर से अधिवक्ता निखिल भंडारी ने पक्ष रखा।

परिवादी के वकील ने उठाया समय निकलने का मुद्दा

अधिवक्ता निखिल भंडारी ने अदालत को बताया कि आरोपी ने जिस विवाह समारोह में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत मांगी थी, उसका निर्धारित समय जून 2026 में ही समाप्त हो चुका है। ऐसे में अब जमानत देने का कोई औचित्य नहीं रह गया है और याचिका अर्थहीन हो चुकी है। इन तर्कों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने चनणाराम विश्नोई की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

15 लाख रुपए मांगने और हत्या की धमकी देने का आरोप

मामले के अनुसार, 18 अगस्त 2024 को जालमसिंह के पिता अनोप सिंह ने सांचौर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि जालमसिंह हुबली में भागीरथ विश्नोई की लॉज पर काम करता था। वेतन विवाद के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद भागीरथ ने जालमसिंह पर पुलिस मुखबिरी कर लॉज से डोडा बरामद करवाने का आरोप लगाते हुए 15 लाख रुपए मांगे और जान से मारने की धमकी दी थी।

परिवादी के अनुसार, 17 अगस्त 2024 को जालमसिंह घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। बाद में भागीरथ ने फोन कर उसके अपहरण की जानकारी दी और 15 लाख रुपए नहीं देने पर हत्या की धमकी दी। पुलिस ने भागीरथ, चनणाराम और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। फिलहाल मामला सांचौर के अपर सत्र न्यायालय में विचाराधीन है।

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