Mandi News: विदेशों में युद्ध की वजह से जीरे की डिमांड में भारी गिरावट आई है, जिसके परिणामस्वरूप जीरे के भाव में मंदी का दौर जारी है। यह स्थिति किसानों के लिए बेहद निराशाजनक साबित हो रही है।
सांचौर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब सांचौर क्षेत्र की जीरा मंडियों में भी देखने को मिल रहा है। विदेशों में युद्ध की वजह से जीरे की डिमांड में भारी गिरावट आई है, जिसके परिणामस्वरूप जीरे के भाव में मंदी का दौर जारी है। यह स्थिति किसानों के लिए बेहद निराशाजनक साबित हो रही है, क्योंकि पिछले दो सालों से कृषि मंडी में जीरे के भाव में लगातार गिरावट देखी जा रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में जीरे की खपत में कमी आई है। पहले, ईरान जैसे देशों से भारत के जीरे की निर्यात में वृद्धि होती थी, लेकिन अब युद्ध की वजह से यह निर्यात प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, अन्य प्रमुख निर्यातक देशों की तरफ से भी कम डिमांड देखी जा रही है, जिससे सांचौर क्षेत्र के किसानों को अपने उत्पादों के लिए उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
पिछले कुछ महीनों से सांचौर क्षेत्र में जीरे के भाव 200 रुपए प्रति किलो से नीचे बने हुए हैं। यह स्थिति किसानों के लिए बहुत ही परेशानी वाली है, क्योंकि जीरे के व्यापार से उनकी आय का मुख्य स्रोत जुड़ा हुआ है। पिछले दो सालों से जीरे की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है, जिसके कारण कई किसान परेशान और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
किसान रामनिवास विश्नोई ने बताया कि हमारे खेतों में जीरे की अच्छी पैदावार हुई थी, लेकिन बाजार में दाम कम होने के कारण हमारी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। अब कि जीरे की खेती पर पुनः विचार कर रहे हैं, क्योंकि इस खेती में अब लाभ कम होता जा रहा है।
सांचौर के प्रमुख जीरा बाजारों में भी मंदी का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो सालों से व्यापार में सुस्ती बनी हुई है और यदि स्थिति ऐसी ही रही तो कई छोटे व्यापारी और किसान इस संकट से उबरने में सक्षम नहीं होंगे।
किसान संगठनों का मानना है कि यदि युद्ध का प्रभाव इस तरह से जारी रहा, तो आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। उन्होंने सरकार से जीरे के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है, ताकि किसान अपने उत्पाद को सही मूल्य पा सकें और उनके जीवन में कुछ सुधार हो सके।
विदेशों में डिमांड कम होने से जीरे के भावों में तेजी नहीं आ रही है। विदेशो में डिमांड बढ़ने पर जीरे के भाव मे तेजी आ सकती है।
जीरे के भावों में बढ़ोतरी नहीं होने से किसानों को पूरे भाव नही मिल रहे हैं, जिससे किसान परेशान है। सरकार को कुछ करना चाहिए।