जांजगीर चंपा

बॉयलर यूनिट में विस्फोट का 30 दिन में रिपोर्ट से खुलेगा राज, SDM डभरा करेंगे जांच, जल्द सामने आएगा सच

Vedanta Power Plant Investigation: सक्ती के वेदांता पावर प्लांट हादसे में जिला प्रशासन ने दंडाधिकारी जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर ने 30 दिनों में रिपोर्ट मांगी है, जबकि SDM डभरा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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बॉयलर यूनिट में विस्फोट का 30 दिन में रिपोर्ट से खुलेगा राज, SDM डभरा करेंगे जांच, जल्द सामने आएगा सच(photo-patrika)

Vedanta Power Plant Investigation: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता पावर प्लांट हादसे को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए दंडाधिकारी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। कलेक्टर ने इस गंभीर औद्योगिक दुर्घटना की विस्तृत जांच के लिए 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस जांच के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) डभरा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।

Vedanta Power Plant Investigation: बॉयलर यूनिट में तकनीकी खराबी से हुआ हादसा

जारी आदेश के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को वेदांता पावर लिमिटेड, सिंघीतराई (तहसील डभरा, जिला सक्ती) स्थित प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में स्टीम पाइप से जुड़े वाटर सप्लाई पाइप के जॉइंट में तकनीकी खराबी के चलते यह हादसा हुआ। इस दुर्घटना में कुल 34 श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें से 12 की मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों का इलाज रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों फोर्टिस जिंदल, एपेक्स और बालाजी मेट्रो अस्पताल में जारी है।

जांच के दायरे में हादसे के सभी पहलू

जिला दंडाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 196 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए जांच के आदेश दिए हैं। जांच अधिकारी को घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहन पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा

जांच के तहत घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तृत पड़ताल की जाएगी, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसा कब और किन परिस्थितियों में घटित हुआ। साथ ही घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद मजदूरों की पूरी जानकारी एकत्र की जाएगी और मृतक एवं घायलों की पहचान की पुष्टि की जाएगी।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि हादसे के पीछे कौन-कौन सी परिस्थितियां और कारण जिम्मेदार रहे, तथा औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर किए गए निरीक्षण में क्या खामियां सामने आई थीं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।

इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार

इसके अलावा तकनीकी खराबी या मानवीय लापरवाही की भूमिका की गहराई से जांच की जाएगी, ताकि यह तय किया जा सके कि इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही सुरक्षा मानकों के पालन और निरीक्षण प्रक्रिया की प्रभावशीलता का भी मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि प्लांट के संचालन शुरू होने के बाद से अब तक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा कितनी बार निरीक्षण किया गया और क्या उन निरीक्षणों में कोई गंभीर खामियां सामने आई थीं। यदि खामियां मिली थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी समीक्षा की जाएगी।

भविष्य के लिए रोकथाम के उपाय सुझाने के निर्देश

जांच अधिकारी को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुझाव और सुरक्षा उपाय प्रस्तुत करें। साथ ही, यदि कोई अन्य महत्वपूर्ण बिंदु सामने आता है, तो उस पर भी अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र होंगे।

औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। फिलहाल प्रशासन की निगरानी में जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले 30 दिनों में रिपोर्ट से हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारों की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

Updated on:
15 Apr 2026 09:44 am
Published on:
15 Apr 2026 09:43 am
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