
जांजगीर-चांपा. जिले के एक लाख से अधिक बच्चों व गर्भवती महिलाओं को पिछले 20 दिनों से पौष्टिक दूध व आहार नहीं मिल पा रहा है। जिले भर में लगभग 2 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र आंगनबाड़ी व सहायिकाओं की हड़ताल के चलते बंद हैं। यहां पढऩे वाले बच्चों को हर दिन पौष्टिक आहार व दूध दिया जाता था, लेकिन अब उन्हें यह पोषण नहीं मिल पा रहा है। इससे बच्चे सहित गर्भवती महिलाओं की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। पहले ही जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या अन्य जिलों से अधिक थी।
Read More : Breaking : मिट्टी तेल डालकर महिला ने खुद को लगाई आग
गर्भवती महिलाओं की खुराक भी हड़ताल के चलते प्रभावित हो रही है। पिछले 20 दिन से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की हड़ताल के चलते यह योजना ठप है। साथ ही केंद्रों में रेडी टू ईट देने की भी योजना भी बंद है। इसके अंतर्गत रोजाना बच्चों को पोषण के लिए चना, फल्ली दाना सहित लड्डू व रेडी टू ईट दिया जाता है। पिछले २० दिनों से आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने से केंद्रों की व्यवस्था बेपटरी हो गई है।
अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर जिले के दो हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका 5 मार्च से हड़ताल पर है। वे जिला मुख्यालय के कचहरी चौक में पंडाल लगाकर शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहीं हैं। इधर उनके हड़ताल में चले जाने से मैदानी स्तर के बच्चों व महिलाओं को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शासन की योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में जहां बच्चों को रेडी टू ईट देना है। ताकि बच्चा स्वस्थ रहे। वहीं गर्भवती महिलाओं को गर्म भोजन देने का प्रावधान है। ताकि गर्भवती महिलाओं का होने वाला शिशु का औषत वजन 2.50 किलोग्राम से अधिक रहे।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जिले में 60 हजार रेडी टू ईट के हितग्राही बच्चे हैं। तो पहीं 40 हजार गर्भवती महिलाएं हैं। भोजन का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों के कार्यकर्ताओं द्वारा वितरण करना होता है, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल से इनकें द्वारा संचालित सभी 21 तरह की योजना पूरी तरह से ठप हैं। इसके लिए शासन हर माह लाखों रुपए खर्च जरूर कर रही है। लेकिन योजना ठंडे बस्ते में है।
स्व सहायता समूह नहीं खोल पा रहे केंद्र
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व आंगनबाड़ी सहायिकाओं के एक साथ हड़ताल में जाने से शासन ने आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की जिम्मेदारी गांव-गांव में किशोरी बालिका व स्व सहायता समूह की महिलाओं को दी है, लेकिन यह ग्रुप भी आंगनबाड़ी केंद्र खोलने में नाकाम साबित हो रहे हैं। जिसके चलते शासन की योजनाएं धरी की धरी रह जा रही।