
Cyber Safety: जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह में आयोजित विशाल धार्मिक समागम में सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य अनिरुद्धाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ बदलते डिजिटल दौर की चुनौतियों से भी सावधान किया। उन्होंने साइबर ठगी के बढ़ते मामलों का जिक्र करते हुए लोगों को मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की सलाह दी।
समागम में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हर व्यक्ति की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। बैंकिंग से लेकर खरीदारी, बातचीत और जरूरी काम तक मोबाइल के जरिए किए जा रहे हैं। ऐसे में साइबर अपराधी भी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। थोड़ी सी लापरवाही लोगों की मेहनत की कमाई को पलभर में खतरे में डाल सकती है।
आचार्य अनिरुद्धाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं से अपील की कि मोबाइल पर आने वाले हर मैसेज, लिंक, फोन कॉल या वीडियो कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए लिंक पर क्लिक करने या उसके कहने पर कोई ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी करने वाले लोग कई बार बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, रिश्तेदार या किसी सरकारी संस्था का कर्मचारी बनकर लोगों से संपर्क करते हैं। ऐसे मामलों में घबराने या जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय संबंधित व्यक्ति या संस्था से आधिकारिक माध्यम से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से बैंकिंग से जुड़ी जानकारी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, ATM या डेबिट कार्ड की जानकारी, PIN, CVV और बैंक खाते से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर लोगों को डराकर या लालच देकर उनकी निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे में किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
आचार्य ने वीडियो कॉल के जरिए होने वाली ठगी से भी लोगों को सावधान किया। उन्होंने कहा कि अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल को स्वीकार करने से पहले सावधानी बरतें। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने और निजी जानकारी साझा करने से भी बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज साइबर अपराध केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गांव और छोटे शहरों के लोग भी इसके निशाने पर आ रहे हैं। इसलिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को डिजिटल सुरक्षा की जानकारी होना जरूरी है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि साइबर ठगी में अपराधी लोगों को कभी इनाम, नौकरी, निवेश या आर्थिक लाभ का लालच देते हैं तो कभी पुलिस केस, बैंक खाता बंद होने या किसी अन्य कार्रवाई का डर दिखाते हैं। दोनों ही परिस्थितियों में घबराने या लालच में आने के बजाय सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति फोन पर तत्काल पैसे भेजने या किसी लिंक पर क्लिक करने का दबाव बना रहा है, तो यह साइबर ठगी का संकेत हो सकता है। ऐसे में बातचीत रोककर संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
समागम में उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल जरूर करें, लेकिन सावधानी के साथ। मोबाइल और इंटरनेट लोगों की सुविधा के लिए हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल करते समय अपनी निजी और आर्थिक जानकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा उपाय जागरूकता और सतर्कता है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करना, संदिग्ध कॉल पर जानकारी साझा न करना और किसी भी आर्थिक लेन-देन से पहले पूरी तरह पुष्टि करना जरूरी है। धार्मिक समागम में बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं को साइबर अपराध से जुड़े इन खतरों के बारे में जागरूक करने का संदेश भी दिया गया। उन्होंने लोगों से खुद सतर्क रहने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी के नए तरीकों के बारे में जानकारी देने की अपील की।